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पहले दिन मां शैलपुत्री के जयघोष से गूंजे मंदिर

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मां शैलपुत्री के जयघोष से गूंजे मंदिर
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सीतापुर। शारदीय नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की विधि-विधान से आराधना की। सुबह से ही मां अंबे के दर्शन-पूजन के लिए मदिरों के बाहर श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं। पहले दिन घरों में कलश स्थापित किए गए। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर मां दुर्गा का गुणगान किया।

शहर के आलमनगर स्थित दुर्गा माता मंदिर, आंख अस्पताल मार्ग स्थित संतोषी माता मंदिर, पराग डेरी के निकट स्थित मां काली मंदिर और पंजाबी धर्मशाला के मां दुर्गा मंदिर में गुरुवार की भोर से ही दर्शन-पूजन शुरू हो गया।
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दर्शन-पूजन के दौरान ‘जय माता दी’ के जयकारे लगते रहे। भक्तों ने विधि-विधान से मां की आराधना कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।

शारदीय नवरात्र के पहले दिन घरों में माता की चौकी बनाकर उस पर कलश स्थापित किया। इसके बाद माता की पूजा की गई। पहले दिन ज्यादातर श्रद्धालुओं ने व्रत रखा।

मान्यता है कि पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में उत्पन्न होने से इनका नाम शैलपुत्री पड़ा है। ये मां पार्वती का ही अवतार हैं। मां शैलपुत्री का आराधना से मनोवांछित फल और कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है।

महमूदाबाद प्रतिनिधि के अनुसार संकटा देवी मंदिर समेत विभिन्न देवी मंदिरों में नवरात्रि की प्रथम देवी शैलपुत्री के स्वरूप का पूजन-अर्चन किया गया। कई स्थानों पर पंडाल सजाकर देवी प्रतिमा की स्थापना की गई।
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संकटा देवी मंदिर, काली मंदिर, दुर्गा मंदिर, बुढ़िया माता मंदिर, अंगारमती, बाबा परमहंस मंदिर बन्नी, हरदिहापुरवा स्थित कालिका देवी मंदिर सहित क्षेत्र में बने पंडालों में मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप का पूजन-अर्चन किया गया।
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