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8 लाख परिवारों को भूख से सुरक्षा

Tue, 01 Mar 2016 10:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ सीतापुर
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सूबे में खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद मार्च में तकरीबन सवा दो लाख परिवार राशन से वंचित रहेंगे। दरअसल, पहली मार्च से खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू कर दिया गया है। इसके बाद केवल ऑनलाइन उपभोक्ताओं को ही राशन देने का प्रावधान है।
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सीतापुर जनपद में तकरीबन सात लाख 91 हजार कार्ड ही ऑनलाइन हो पाए हैं। जबकि 2.23 लाख राशनकार्ड ऑनलाइन किए जाने बाकी हैं। राशनकार्ड ऑनलाइन न होने से इन्हें राशन पाने के लिए इंतजार करना होगा। मार्च में राशन उन उपभोक्ताओं को मिलेगा, जिनके कार्ड ऑनलाइन हो चुके हैं।

जिले में करीब 10 लाख 14 हजार 667 कार्डधारक हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में करीब 7 सात 91 हजार कार्डों का डाटा ऑनलाइन फीड हो पाया है। जबकि 2 लाख 23 हजार 667 कार्ड अभी फीड नहीं किए जा सके हैं।
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अब खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद ऑनलाइन रजिस्टर्ड कार्डधारकों को ही राशन मिलेगा। इन्हीं का राशन कोटेदार को भेजा जाएगा। ऐसे में मार्च महीने में जिले के 7 लाख 91 हजार कार्डधारकों को ही राशन मिल सकेगा।

जबकि अन्य कार्डधारकों का ब्योरा फीड होने तक राशन का इंतजार करना पड़ेगा। इसेे लेकर आपूर्ति विभाग भी साफ कर चुका है कि कोटेदार को उतनी मात्रा में ही राशन दिया जाएगा, जितने राशन कार्ड ऑनलाइन हुए होंगे।

कोटे पर तीन रुपये किलो के हिसाब से चावल व दो रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से गेहूं मिलेगा। इसी रेट पर अंत्योदय कार्ड धारकों को भी राशन दिया जाएगा। इस नए नियम से वे कार्ड धारक बेहद परेशान हैं, जिनके कार्ड अभी तक ऑनलाइन नहीं हो सके हैं।

50 से 70 रुपये दे रहे कार्डधारक
अपने कार्ड को ऑनलाइन कराने के लिए कार्ड धारकों को 50 से 70 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। फीडिंग का काम जन सुविधा केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा है। जिसकी फीडिंग का कोई मूल्य तय नहीं है। कहीं पर 30 रुपये, तो कहीं 50 रुपये और कहीं-कहीं 70 रुपये कार्ड का ब्योरा ऑनलाइन करने के लिए लिया जा रहा है।

वहीं आने-जाने में अलग रुपये खर्च हो रहे हैं। ऐसे में वे कार्डधारक बेहद परेशान हैं, जो गरीबी रेखा के नीचे आते हैं। उनके लिए एक वक्त का राशन जुटा पाना मुश्किल है। ऐसे में कार्ड ऑनलाइन कराने में इतना पैसा आखिर वह कहां से लाएंगे।

कोटेदार परेशान
कोटेदारों का कहना है कि गोदाम से राशन की दुकान तक राशन पहुंचने के लिए सरकार भाड़ा देने की बात कह रही है, लेकिन अभी तक किसी दुकानदार को राशन ढोआई का भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे में कोटेदार अपने पास से किराया लगाकर राशन की उठान कर रहे हैं।
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