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मुसैदाबाद के करीब दहाड़ रहा तेंदुआ

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रविवार शाम को किसान ने तो सोमवार सुबह दूधिये ने देखा
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सरैंया (सीतापुर)। सदरपुर क्षेत्र में दहशत का पर्याय बना तेंदुआ रविवार की रात क्षेत्र के मुसैदाबाद गांव के करीब खेतों में दहाड़ता रहा। गांव के लोगों ने जहां उसके दहाड़ने की आवाज सुनी। वहीं गांव के एक किसान ने रविवार की शाम खेत में तो एक दूधिये ने सोमवार की सुबह रास्ते में तेंदुए को देखे जाने की पुष्टि की है।

हालांकि अब वन विभाग भी इस क्षेत्र में तेंदुआ की मौजूदगी से इंकार नहीं कर रहा है। यहां बता दें कि जनवरी माह से सदरपुर क्षेत्र में तेंदुआ मौजूद है। मुसैदाबाद निवासी विपिन कुमार रविवार की शाम खेत की तरफ गया था। बताते हैं कि जब वह खेत के निकट पहुंचा, तो खेत का नजारा देख उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
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क्योंकि सामने खेत में तेंदुआ बैठा हुआ था। तेंदुआ देखते ही किसान खेत में वापस लौट आया। मुसैदाबाद के बाशिंदों की माने तो पूरी रात तेंदुआ गांव के निकट खेतों में दहाड़ता रहा। सोमवार की सुबह गांव का देवीदयाल दूध लेकर निकला था। बताते हैं कि गांव के बाहर ही रास्ते में तेंदुआ मिल गया।

उसे देख देवीदयाल काफी देर तक खड़ा रहा। जब तेंदुआ झाड़ियों में गया, तब देवीदयाल आगे बढ़ा। मुसैदाबाद हो, लक्ष्मनपुर हो या फिर बेनी माधवपुर इन तीन गांवों के बाशिंदे बेहद डरे हुए हैं। वजह यह है कि ये ही ऐसे गांव हैं, जिनके आसपास तेंदुआ अक्सर देखा जा रहा है।

तेंदुआ की चहलकदमी और उसकी दहाड़ दहशत में और इजाफा कर रही है। वन विभाग का हाल यह है कि वह पिंजड़ा लगाकर बैठ गया है। उसे इंतजार है कि तेंदुआ कब आए और कब पिंजड़े में खुद जाकर फंसे। वन विभाग की इस तरह की कार्रवाई से लोगों में आक्रोश भी पनप रहा है।

अजगर ने रोकी वन कर्मियों की राह
सदरपुर में जहां एक तरफ तेंदुआ उत्पात मचाए हुए हैं, वहीं वनकर्मियों के सामने अजगर मुसीबत बनकर आ रहा है। रविवार की रात तेंदुआ की लोकेशन लेने के लिए वन दरोगा संतोष कुमार वर्मा टीम के साथी जय प्रकाश, सुशील आदि के साथ गश्त पर निकले थे।

बताते हैं कि जब ये बेनी माधवपुर के करीब पहुंचे, तभी नहर पटरी पर एक विशालकाय अजगर आ गया। उसे देखकर वनकर्मी ठिठक गए। बताते हैं कि करीब 20 मिनट के बाद अजगर ने राह छोड़ी और जंगल में गया। तब कहीं जाकर वनकर्मी आगे बढ़ सके।

वनकर्मियों को मिला चौपहिया वाहन
अमर उजाला में ‘वनकर्मी भी असुरक्षित’ शीर्षक की खबर पढ़ने के बाद वन विभाग के अधिकारी हरकत में आए हैं। उन्होंने खबर को गंभीरता से लेते हुए तेंदुआ की निगरानी में लगे वनकर्मियों को चौपहिया वाहन उपलब्ध कराया है। यहां बता दें कि सोमवार के अंक में अमर उजाला ने वनकर्मियों की उस पीड़ा को उजागर किया था। जिसमें वनकर्मी खुद ही असुरक्षित थे।

इस खबर में बताया गया था कि किस तरह से खुले में चल रहे वनकर्मी हर समय खतरे का सामना कर रहे हैं। वन अधिकारियों ने इस खबर को गंभीरता से लेते सोमवार को ही चौपहिया वाहन मौके पर भेजा। प्रभारी रेंजर अनूप बाजपेयी ने बताया कि अब वनकर्मी सुरक्षित होकर गश्त कर सकेंगे।

दिनभर ली जाती रही टोह
तेंदुआ की मौजूदगी को लेकर वन विभाग सोमवार को भी हलकान रहा। विभाग की टीम ग्रामीणों के साथ तेंदुआ की टोह लेते हुए नजर आई। पूरा दिन वनकर्मी सिर्फ इस बात का ही पता लगाते रहे कि आखिर तेंदुआ कहां पर मौजूद है। हालांकि वनकर्मी सांझ ढलने के बाद भी तेंदुआ को नहीं खोज पाए।
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वन विभाग का मानना है कि देर से सही, लेकिन वह बेनीमाधवपुर के पास मौजूद पिंजड़े में कदम जरूर रखेगा। वह भूखा होने पर पिंजड़े के अंदर मौजूद बकरी को शिकार बनाने के लिए जैसे ही पिंजड़े में कदम रखेगा, वह कैद हो जाएगा।
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