सीतापुर। सीएचसी व पीएचसी पर संस्थागत प्रसव के तमाम दावे किए जा रहे हैं। इसके बावजूद 66 फीसदी गर्भवती बिना प्रसव के ही हायर सेंटर रेफर की जा रही हैं। प्रसव के दौरान उनकी जोखिम स्थिति के कारण चिकित्सक रिस्क लेने से बचते हुए रेफर करना ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं। यह खुलासा जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर की समीक्षा में उजागर हुआ है। इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए डीएम ने सभी सीएचसी अधीक्षकों से गर्भवतियों को रेफर करने का अनुपात कम करने का निर्देश दिया है।
जिले में 20 सीएचसी पर प्रसव की सुविधा उपलब्ध है। यहां पर महिला चिकित्सक होने के साथ ही जिला महिला अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा भी मुहैया है। विभागीय स्तर पर संस्थागत प्रसव को अधिक से अधिक बढ़ावा देने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। पीएचसी पर भी एएनएम के सहारे प्रसव कराए जा रहे हैं। इसके बाद भी अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। सीएचसी पहुंचने वाली 66 फीसदी महिलाओं को केवल भर्ती करके प्राथमिक इलाज के बाद थोड़ी सी भी हालत बिगड़ती देख सीधे जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
समीक्षा में यह बात भी सामने आई कि रेफरल केस में कई मामलों में प्रसूता की हालत गंभीर नहीं थी। सीएचसी पर ही प्रसव हो सकता था। इसके बाद भी उन्हें रेफर कर दिया गया। डीएम ने कहा कि चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निर्वहन करें। गंभीर हालत में ही रेफर किया जाए। रेफर रजिस्टर पर कारण जरूर अंकित करें।
संस्थागत प्रसव में लाएं तेजी
सीएचसी व पीएचसी पर प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सभी सीएचसी अधीक्षकों को निर्देशित किया गया है। गंभीर स्थिति में ही रेफर करने के निर्देश दिए गए हैं। जिससे इस अनुपात को कम किया जा सके।
डॉ. सुरेश कुमार, सीएमओ