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62 गांव बाढ़ की चपेट में, मचा हाहाकार 

Fri, 12 Aug 2016 11:36 PM IST
Amarujala Bureau
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घाघरा नदी से कटान
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गांजर के बाढ़ग्रस्त इलाके में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। घाघरा नदी इस कदर उफनाई कि क्षेत्र की सारी सड़कें व संपर्क मार्ग जलमग्र हो गए हैं। घरों में दो से तीन फीट तक पानी घुसा हुआ है। वहीं क्षेत्र के दो और गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
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इससे स्थिति और भयावह होती जा रही है। बढ़ते जलस्तर को देख बाढ़ पीड़ितों की धडक़नें तेज हो गई हैं। बहुत से ऐसे स्थान हैं, जहां पर बाढ़ पीड़ितों ने डेरा डाल रखा था, वो भी बाढ़ की जद में आ गए हैं। जलस्तर बढने से क्षेत्र के 62 गांव बाढ़ की चपेट में हैं।

हालत ये है कि जिधर देखो उधर पानी ही पानी नजर आ रहा है। सबसे बड़ा खतरा दुर्गा पुरवा के निकट है, जहां पर घाघरा ने प्रमुख मार्ग को ही निकल लिया है। इस गांव के लोग अब निकल भी नहीं सकते हैं। उधर, शारदा व घाघरा बैराजों से ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिससे हालात और बिगड़ने के आसार नजर आ रहे हैं।
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गांजर क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त इलाके में अभी तक मैनेजर पुरवा व गौढ़ी गांव बाढ़ से अछूते थे। बुधवार की रात बाढ़ का जलस्तर इस कदर बढ़ा कि गांव में पानी प्रवेश कर गया। हालत ये है कि जो लोग सूखे में चारपाई व तख्त डालकर सो रहे थे, सुबह होने पर जैसेे ही बिस्तर से पैर नीचे किया, सीधे बाढ़ के पानी से उनका सामना हुआ।

घरों में एक से दो फीट तक पानी भरा हुआ था। गांव के सारे रास्ते जलमग्र थे और जलस्तर बढ़ता ही जा रहा था। उधर, बाढ़ग्रस्त मारू बेहड़ से दुर्गा पुरवा जाने वाला मार्ग बसंतापुर के करीब जलमग्र हो गया है। क्षेत्र के सारे रास्ते पानी में समाए हुए हैं। लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। सोमवारी पुरवा, कोनी, जैतहिया, मरेली, रामलाल पुरवा, गार्गी पुरवा आदि समेत 40 गांवों में दो से तीन फीट तक पानी भरा हुआ है।

दुर्गापुरवा जाने वाली प्रमुख सडक़ करीब 300 मीटर दूरी तक कट गई है। जिसकी वजह से दुर्गा पुरवा व कोनी के ग्रामीण फंसकर रह गए हैं। दुर्गा पुरवा में निर्मल पुरवा गांव के कटान पीड़ित डेरा जमाए हुए थे, अब यहां भी उन्हें बाढ़ की मुसीबत से सामना करना पड़ रहा है। सैलाब इस कदर है कि न तो रास्ते नजर आ रहे हैं और न खेत।

बाढ़ में सैकड़ों परिवार फंसे हुए हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि लगातार पानी भरे रहने से घर की नींव कमजोर हो गई हैं। छप्पर की थम्हरिया जवाब दे रही हैं। जिन लोगों के पास नावें हैं, वे परिवार को नावों पर शरण दिए हुए हैं। पीड़ितों का कहना है कि बाढ़ के पानी से बाहर निकलने का प्रयास करना जान जोखिम में डालने के बराबर है।

नदी के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव पर भी बाढ़ का संकट गहरा गया है। वहां पर पानी तेजी से बढ़ रहा है। इस टापू पर करीब 300 परिवार फंसे हुए हैं, जो मदद की राह ताक रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन भले ही उन्हें राहत सामग्री न दे, लेकिन इस बाढ़ की मुसीबत से बाहर निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दे। पूरे बाढ़ग्रस्त इलाके में त्राहि-त्राहि मची हुई है। उधर, शारदा व घाघरा बैराजों से करीब 249113 क्यूसेक पानी नदियों में छोड़ा गया है। जिससे हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
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