नोटबंदी से सीतापुर नगर पालिका की लाटरी खुल गई। यहां पर भवन स्वामियों पर पालिका का तकरीबन तीन करोड़ हाउस टैक्स व जलकर बकाया था। पर इसकी अदायगी में लोग आनाकानी कर रहे थे। लेकिन नोटबंदी के बाद भवन स्वामियों ने हजार व पांच सौ रुपये की करेंसी खूब खपाई।
पिछले पचास दिन में पालिका कोष में करीब 62 लाख रुपये जमा हुए हैं, हालांकि अभी भी टैक्स में रूप में करीब ढाई करोड़ रुपये वसूला जाना बाकी है। बकाया रकम वसूली के लिए पालिका अभियान चलाने की तैयारी में है।
मालूम हो कि नगरपालिका द्वारा शहर बाशिंदों को मूलभूत सुविधाएं दी जाती है। इसके बदले बाशिंदों से प्रति वर्ष हाउस टैक्स व जलकर वसूला जाता है। लेकिन इस रकम को जमा करने में बाशिंदें बहुत कम रुचि लेते हैं। इधर, पांच सौ व हजार के नोटबंदी के चलते इस वसूली में काफी तेजी आई।
टैक्स के रूप में यह नोट मान्य किए गए थे। जिस पर लोगों ने अपने पुराने नोट खपाने के चक्कर में दिल खोलकर बकाया टैक्स जमा कर दिया। नगरपालिका के मुताबिक आठ नवंबर से 31 दिसंबर 2016 के बीच करीब 62 लाख रुपये टैक्स के रूप में जमा हुआ है।
यह रकम काफी समय से बकाएदारी में चल रही थी। यह रुपया जलकल, गृहकर व दाखिल खारिज आदि मदों से अर्जित की गई है। इसके बावजूद इन मदों में करीब ढाई करोड़ रुपये अभी भी बकाया है। फिलहाल नगरपालिका को नोटबंदी से फायदा हुआ है। अब बकाएदारों के खिलाफ अभियान चलाकर टैक्स की वसूली की जाएगी।