सीतापुर। प्रधान व पंचायत सचिव अब 14वें वित्त आयोग की धनराशि में घालमेल नहीं कर सकेंगे। इस पर अंकुश लगाने को केंद्र ने ग्राम पंचायतों में बजट ट्रांसफर से लेकर व्यय प्रणाली को ऑनलाइन बना दिया है। पीएफएमएस प्रणाली से ये काम होगा। प्रधान व सचिव के डिजिटल साइन से लेनदेन करेंगे। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
ग्राम पंचायतों में 14वें वित्त आयोग की धनराशि पंचायतराज विभाग की ओर से ग्राम निधि-1 के खाते में भेजी जाती है। अभी तक इसे प्रधान व पंचायत सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से बैंक से ड्रा किया जाता है। इससे धन के दुरुपयोग का पता लगाने में दिक्कत होती है। इस धनराशि के दुरुपयोग की शिकायतें आ रही थीं। मनमाने तरीके से बिना कार्य कराए धन खर्च किया जा रहा था।
इसके चलते 14वें वित्त की धनराशि के लेनदेन की व्यवस्था पारदर्शी बनाने का फरमान जारी हुआ है। इसके तहत धनराशि पीएफएमएस से भेजी जाएगी। इसके लिए इस प्रणाली पर ग्राम पंचायतों का रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है। 14वें वित्त की धनराशि ग्राम निधि-1 के खाते में भेजने के बाद इसे खर्च करने के लिए धन की निकासी डिजिटल हस्ताक्षर से होगी। इसे अमल में लाने के लिए प्रधान व पंचायत सचिव के डिजिटल हस्ताक्षर बनवाए जाएंगे। इसका प्रमाणपत्र शासन को भेजा जाएगा।
अच्छे कार्य अमल में लाने की रफ्तार सुस्त
पीएफएमएस प्रणाली लागू होने से जिम्मेदारों की घपलेबाजी पकड़ में आ जाएगी। इससे उन पर कार्रवाई शीघ्र होगी। यही कारण है कि नवीन व्यवस्था को अमल में लाने की रफ्तार काफी सुस्त है। पंचायतीराज मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव संजीव पटजोशी ने पीएफएमएस व्यवस्था लागू करने के संबंध में 20 मार्च 2018 को डीओ लिखा था। इसके बाद चार मई व छह जून का रिमाइंडर भेजा। इसके बावजूद अभी तक निर्देशानुसार कार्रवाई नहीं हो सकी है।
प्रथम चरण में पंचायत सचिवों के डिजिटल साइन बनवाकर इसका प्रमाणपत्र निदेशक पंचायतीराज को भेजा जाना है। इसके लिए अधिकृत फर्म के मार्फत कार्य कराने की कार्रवाई की जा रही है। शीघ्र ही प्रमाणपत्र भेजा जाएगा।
तुलसीराम विश्वकर्मा, डीपीआरओ