जिले में शारदा व घाघरा ने तेज किया कटान, तटीय क्षेत्र के बाशिंदे पलायन करने को मजबूर
रेउसा/ सीतापुर। जिले के गांजरी इलाके में शारदा व घाघरा नदियों का कहर जारी है। जलस्तर में मामूली गिरावट की वजह से कई संपर्क मार्गों से पानी हट गया है। लेकिन नदियों ने कटान तेज कर दिया है। इससे समस्या और भी गंभीर होती जा रही है।
कटान के भय से तटीय क्षेत्र के बाशिंदे पलायन करने को मजबूर हैं। गुरुवार को 13 घर और 30 बीघा खेत कटकर नदी में बह गए। उधर बैराजों से गुुरुवार को भी सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे बाढ़ का खतरा टलता नजर नहीं आ रहा है।
इन दिनों शारदा नदी तेजी से कटान कर रही है। धूसेपुरवा में छेद्दू, मायाराम, प्रमोद, बखारू, मुन्नीलाल व श्रीपाल के घर कटकर नदी में समा गए हैं। इसी तरह से घाघरा कोनी गांव में कहर बरपा रही है। यहां पर नदी ने रामलाल, रामू, बाबू, बालज्योति, भगौती आदि के घरों को निगल लिया है।
इससे करीब 13 परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। राहत की बात यह है कि कटान से पहले ही पीड़ित परिवार घरों को छोड़कर निकल लिए थे। वहीं तटीय इलाके में रामलखन, सोबरन, मनीराम, वीरेंद्र, छैलू, भरोसे, कुलेराज की 30 बीघा खेत कटकर नदी में बह गए हैं।
घाघरा के जलस्तर में गुरुवार को भी गिरावट देखने को मिली है। लेकिन कोनी गांव के हालात जस के तस हैं। इतना जरूर है कि गांवों के संपर्क मार्गों से बाढ़ का पानी हट गया है। जिससे लोगों को आवागमन में हो रही दिक्कतें दूर हो गईं।
जैतहिया, रामलाल पुरवा, फौजदार पुरवा, चहलारी के सरकारी स्कूलों में पानी अभी भी भरा हुआ है। इससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों को बुखार, उल्टी दस्त जैसी शिकायतें हो रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दूषित पानी पीने की वजह से ऐसी नौबत आ रही है।
बाढ़ ग्रस्त इलाके में पानी जरूर कम हुआ है, लेकिन गांवों से लेकर खेतों तक अब भी लोगों को नावों से ही सफर करना पड़ रहा है। उधर गुरुवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 2,32,108 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे आने वाले दिनों में जल स्तर में कमी के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
खबर छपने के बाद हरकत में आया प्रशासन
रेउसा। अमर उजाला में बाढ़ पीड़ितों की खबर छपने के बाद गुरुवार को प्रशासन हरकत में आया है। आननफानन में जहां बाढ़ राहत चौकी का बैनर लगाया है। वहीं स्वास्थ्य टीमों को भी बाढ़ पीड़ित गांवों में भेजा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने तीन गांवों में पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण किया और दवाएं बांटी हैं।
यहां बता दें कि एक तरफ नदियां कहर बरपा रही हैं। तो दूसरी तरफ प्रशासन मदद के दावे कर रहा था। अमर उजाला टीम ने जब मौके पर जाकर हकीकत देखी, तब प्रशासन की पोल पट्टी खुल गई। प्रशासन द्वारा बताए गए स्थान पर कहीं भी बाढ़ राहत चौकी नहीं खोली गई थी।
जबकि बाढ़ग़्रस्त क्षेत्र में कहीं भी स्वास्थ्य टीम नजर नहीं आई। जबकि उस क्षेत्र में लोग बीमार हो रहे थे। हकीकत जब खबर बनी और छपी, तब प्रशासन में हड़कंप मचा। गुरुवार को आननफानन में मारू बेहड़ में बाढ़ राहत चौकी खोल दी गई।
यह अलग बात है कि वहां पर इंतजाम नदारद हैं। लेकिन बैनर जरूर लगा दिया गया है। गुरुवार को स्वास्थ्य टीमों ने नगीना पुरवा, दुर्गा पुरवा व नेवादा गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान टीम को 20 ऐसे मरीज मिले जिन्हें उल्टी दस्त की शिकायतें थीं। स्वास्थ्य टीमों ने परीक्षण करके दवाएं भी बांटी।
बेघर हो रहे लोग, सड़कों पर पहुंचे
लहरपुर। तहसील क्षेत्र में शारदा नदी का कहर तटीय क्षेत्र की आबादी पर जारी है। कटान की वजह से ग्राम रतौली डीह में 107 परिवार, अकबरपुर में 10 परिवार, हरखी बेहड़ में 9 परिवार और बड़ारिया के 11 परिवारों के घर कटकर नदी में बह गए हैं। कुल 893 व्यक्ति कटान की वजह से प्रभावित हुए हैं।
जिनको सरकारी स्कूलों, पंचायत भवन एवं सुरक्षित स्थानों पर शरण दी गई है। एसडीएम पूर्णिमा सिंह ने बताया कि पीड़ितों को मदद दी जा रही है। इधर भाजपा विधायक सुरेश राही गुरुवार को कटान प्रभावित गांवों को पहुंचे। उन्होंने पीड़ितों से मुलाकात की और हरसंभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया।