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डेंगू का खात्मा करेगी गंबूसिया मछली

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गंबूसिया मछली पालें और डेंगू से बचे
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अस्पताल परिसर में डेंगू से बचाव विषयक कार्यशाला

सीतापुर। गंबूसिया मछली पालकर डेंगू से निजात पाई जा सकती है। यह मछली डेंगू के मच्छरों व लार्वा को चट कर जाती है। लोग घरों में भी इस मछली को पाल सकते हैं। रविवार को जिला अस्पताल परिसर में डेंगू से बचाव के लिए आयोजित कार्यशाला में डेंगू से बचाव के तरीके बताए गए।
इस मौके पर मुख्य अतिथि मुख्य अतिथि इंद्रमणि राजा ने बताया कि गंबूसिया मछली घर से लेकर नाले, नालियों व गड्ढों में रह सकती है। यह पानी पर पनपने वाले मच्छर व लार्वा को खा जाती है। कहा कि अगर डेंगू से बचना है तो गंबूसिया मछली को पालना सबसे सरल उपायों में एक है। बताया कि घर में कोई भी पुराना टब, ड्रम, बड़ा डिब्बा, वेस्ट कूलर में कम से कम 30 से 40 लीटर पानी डालें। उसकी तली में मौरंग डालें। उसमें एक जलीय पौधा या फिर एक मनी प्लांट लगा दें। यह बर्तन छायादार स्थान पर ही रखें। जिसके बाद 4 से 5 जोड़ा गंबूसिया मछलियों को उसमें डाल दें। यह मछली एक माह में 80 से 120 बच्चे देती है। जिससे इसकी संख्या तेजी से बढ़ेगी। ये मछलियां मच्छरों व लार्वा को खाती हैं। 24 घंटे में अपने भार से 40 गुना अधिक मच्छरों व लार्वा को खा जाती हैं। मछलियों के बच्चों को निकट की नाली, नाला, गड्ढे में भी डाल सकते हैं। यह मछली वहां भी मच्छरों व लार्वा को चट कर जाएगी। गंबूसिया मछली पालकर मच्छरों के प्रकोप से आसानी से बचा जा सकता है। जिससे मच्छर जनित बीमारी की चपेट में आने से परिवार बचा रहेगा। इस मौके पर डॉ.एके गौतम, डॉ. प्रवीन कुमार, रश्मि,आकाश बजरंगी, विक्रम सिंह आदि मौजूद थे।
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मछली को ये खिलाएं
घर में जब भी गंबूसिया मछली पालें, तो उसे एक चुटकी ब्रेड व बिस्किट डालें। हो सके तो केले के छिलके को डाल दें। गंभूसिया मछली उसे बड़े चाव से खाती है। इससे मछली को पालने में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आएगी।
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