घाघरा का बढ़ता-गिरता जलस्तर गांजरवासियों की मुसीबत का सबब बना हुआ है। शुक्रवार को पानी घटा, लेकिन कटान तेज हो गया। पचीसा में दस आशियाने कटान के मुहाने पर हैं। परमेश्वरपुरवा, गोड़ियनपुरवा और दुर्गापुरवा में 60 बीघा खेत बाढ़ का पानी लील गया, जबकि इतनी ही खेती कटान की कगार पर है।
यहां धीमी गति से जमीन की कटान लगातार जारी है। बाढ़ के पानी से घिरे 50 गांवों में से कई गांवों तक राहत के नाम पर कुछ भी नहीं पहुंचा है। जिससे बाढ़ पीड़ितों को खाने के लाले पड़ गए हैं। अपने आशियाने गंवाकर बेघर हुए लोग सड़क के किनारे डेरा डालकर गुजर-बसर करने को मजबूर हैं।
ब्लॉक रेउसा के टापू बने पचीसा गांव में हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। शुक्रवार को घाघरा का जलस्तर घटने के बाद भी यहां कटान में तेजी आ गई। पचीसा के सुबेदार, गोकरन, खेलावन, दिलेराम, केशव तथा बाबू आदि के घर कटान के मुहाने पर पहुंच गए हैं।
वहीं परमेश्वरपुरवा, दुर्गापुरवा तथा गोड़ियनपुरवा के संतोष, दिनेश, राम नरेश, सोहन, बच्चाराम आदि के 60 बीघा खेत नदी में समा गए। जबकि बाढ़ का पानी धीमी गति से लगातार जमीन का कटान कर रहा है। बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री मुहैय्या कराने वाला सरकारी अमला बेहद सुस्त है।
हालात यह हैं कि बाढ़ में पूरी तरह से घिरे 50 गांवों में से लोधनपुरवा, पसिनपुरवा, कोनी, गार्गाीपुरवा, मरेली, लालापुरवा और टपरी आदि में पिछले एक पखवाड़े से राहत के नाम पर कुछ नहीं पहुंचा है। इन गांवों के बाढ़ पीड़ितों का बुरा हाल है।
परिवार के मुखिया किसी तरह नाव के जरिए बाहर आकर खाने का इंतजाम करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जो सरकारी मदद आती भी है, वह नाकाफी रहती है। सिसैया बाजार के बाढ़ प्रभावित बेघर होकर लोधनपुरवा के स्कूल में शरण लिए हैं। जबकि निर्मलपुरवा के तमाम बेघर बाढ़ पीड़ित दुर्गापुरवा में सड़क के किनारे डेरा डालने को मजूब हैं।