गिरी कच्ची दीवार तो कहीं छप्पर व टिनशेड ढहने से हादसा
सीतापुर। जिले में सोमवार की रात से शुरू हुई झमाझम बारिश से समूचा जिला पानी-पानी हो गया। यह बारिश जहां किसानों के लिए अमृत बनकर बरसी, वहीं शहरी-गंवाई इलाकों के बाशिंदों के लिए मुसीबत का सबब बन गई। बारिश के दौरान जिले में अलग-अलग स्थानों पर दीवारें, टिनशेड व छप्पर गिरते रहे।
इससे मिश्रिख में एक किशोर की दबकर मौत हो गई। जबकि रेउसा, सकरन व महमूदाबाद में छह लोग घायल हो गए। घायलों को क्षेत्र की सीएचसी व जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कभी धीमी तो कभी तेज बारिश से जगह-जगह जलभराव हो गया। सड़कें, गलियां नालों के रूप में नजर आई।
मिश्रिख प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के ग्राम फुलरुवा निवासी मौजीलाल का पुत्र चमन कुमार (16) मंगलवार की दोपहर पानी लेने के लिए घर के बाहर हैंडपंप पर गया था। बताते हैं कि जिस वक्त चमन पानी भर रहा था। उसी दौरान उसके घर की भारी भरकम मिट्टी की दीवार गिर गई।
इससे चमन मलबे में दब गया। घटना को देख परिवारीजनों व ग्रामीणों ने आननफानन मलबा हटाकर चमन को बाहर निकाला। लेकिन तब तक वह गंभीर रूप से घायल हो चुका था। परिवारीजन उसे लेकर सीएचसी भागे। लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
रेउसा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के ग्राम गुड़रुवा देवरिया निवासी सैयद अली का पुत्र समीर (5) सोमवार रात टिनशेड के नीचे सो रहा था। आधी रात के वक्त अचानक तेज हवा से टिनशेड दीवार समेत गिर गया। ग्रामीणों व परिवारीजनों ने मलबा हटाया, लेकिन तब तक समीर घायल हो चुका था।
इधर अक्सोहा गांव में देर रात चंद्रशेखर (35) का छप्पर दीवार समेत गिर गया। इससे चंद्रशेखर व उसके परिवार के शिवलाल (12) व चंद्रभूषण (15) गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का इलाज कस्बे की सीएचसी में कराया गया है। सकरन के ग्राम मिथौरा लखनियापुर निवासी रहीस का पुत्र जलीस (10) गांव में ही खेलने गया था।
बताते हैं कि वह गांव के जिबराइल के घर के करीब खेल रहा था। इसी दौरान जिबराइल के आंगन की कच्ची दीवार जलीस पर गिर गई। ग्रामीणों ने आननफानन मलबा हटाकर बालक को बाहर निकाला। लेकिन तब तक वह गंभीर रूप से घायल हो चुका था।
परिवारीजनों ने उसे लहरपुर सीएचसी पहुंचाया। यहां पर डॉक्टरों ने बालक को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। महमूदाबाद प्रतिनिधि के मुताबिक रमुवापुर निवासी अनिल कश्यप की पत्नी संगीता (35) अपने घर के आंगन में स्नान कर रही थी।
इसी वक्त पड़ोसी राकेश कुमार के घर की ईंट-गारे से बनी दीवार गिर गई। जिससे महिला मलबे में दबकर घायल हो गई। उसे सीएचसी महमूदाबाद में भर्ती कराया गया है। इधर लहरपुर कस्बे में मोहल्ला गनी टोला निवासी कल्लू की कोठरी की छत ढह गई। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ।
ऐसी हुई बरसात कि दिन में हो गई रात
मंगलवार को सुबह से ही आसमान में बादल छाये हुए थे और रिमझिम बारिश हो रही थी। लेकिन दोपहर करीब 12 बजे आसमान में इस कदर काले घने बादल छाये की, पूरा शहर में अंधेरे छा गया। ऐसा लग रहा था कि जैसे दोपहर में ही दिन ढल गया है और रात हो गई है। हालांकि इस दौरान बादल झूमकर बरसे। जिससे सड़क से लेकर ताल-तलैया लबालब भर गए।
जलनिकासी की खुली पोल, गली-मोहल्लों में जलभराव
सावन की बारिश ने नगर पालिका की जलनिकासी की व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। नाले व नालियां चोक पड़ी है। जिससे बारिश का पानी मोहल्लों से निकल नहीं पाया। नतीजा पूरा का पूरा शहर पानी पानी नजर आ रहा था।
शहर के मोहल्ला पूर्णागिरी नगर, विकास नगर, खूबपुर, श्रीनगर कॉलोनी, नारायन नगर, आवास विकास, विजय लक्ष्मी नगर, लोहार बाग, घूरामऊ बंगला, लोनियन पुरवा, आनंद नगर आदि मोहल्लों में रास्ते तो लबालब हो ही गए। वहीं लोगों के घरों में भी पानी घुस गया। इससे आम जनमानस परेशान रहा।
जिला अस्पताल में भी छतों से टपक रहा था पानी
सीतापुर। मौसम की मार से जिला अस्पताल भी अछूता नहीं रहा है। यहां भी अस्पताल परिसर से वार्डों व गैलरी में पानी ही पानी नजर आ रहा था। कहीं पर छत टपक रही थी, तो कहीं पर टिनशेड से पानी झरने के जैसे गिर रहा था।
ऐसे में अस्पताल के कर्मचारी पानी निकालते नजर आ रहे थे। जो बेहद परेशान थे, क्योंकि जितना पानी वे बाहर निकालते थे, उससे कई गुना पानी वहां जमा हो जाता था। अस्पताल में फिजियोथैरेपी वार्ड में लगी मशीनें बिजली से चलती हैं। लेकिन जिस कमरे में फिजियोथैरेपी वार्ड बनाया गया था।
उसकी छत इस कदर टपकी कि पूरा का पूरा वार्ड पानी से भर गया। नतीजा मशीनों से करंट उतरने लगा। इससे पहले कि कोई अनहोनी होती, अस्पताल प्रशासन को यह वार्ड बंद कराना पड़ा। अब अस्पताल में फिजियोथैरेपी के मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है।
मंगलवार को इमरजेंसी वार्ड की ही छत टपक रही थी। हालत यह थी की वार्ड की देखभाल में तैनात नर्स की मेज पर ही पानी गिर रहा था, जिसकी वजह से नर्स फाइलों को बचाने के लिए इधर-उधर भटक रही थी। वहीं इमरजेंसी के दरवाजे के करीब पड़े बेड को भी खाली कराना पड़ा। क्योंकि इस बेड पर पानी की बारिश हो रही थी।
रेउसा सीएचसी के वार्ड बने तालाब
रेउसा। यूं तो बारिश का असर हर ओर देखने को मिला है। लेकिन रेउसा सीएचसी में कुछ अलग ही नजारा नजर आ रहा था। यहां पर तो पूरा का पूरा सीएचसी जलभराव की समस्या से जूझता नजर आया। क्या डॉक्टर और क्या मरीज सभी परेशान थे।
हालत यह थी कि अस्पताल तक पहुंचने वाला रास्ता तो बरसाती पानी में समा गया था। वहीं सीएचसी में इमरजेंसी, लेबर रूम व वार्ड हर जगह पानी भरा हुआ था। देखने में ऐसा लग रहा था कि जैसे सीएचसी अस्पताल न होकर तालाब में परिवर्तित हो गया हो। हालत यह थी कि न तो डॉक्टर इलाज कर पा रहे थे और मरीजों को राहत मिल रही थी।
जो मरीज भर्ती थे, उन्हें और बीमार होने का खतरा मंडरा रहा था। सबसे अहम बात यह है कि सीएचसी में भरा पानी कोई कस्बे से बहकर नहीं पहुंचा था। बल्कि छत टपक रही थी। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनंत मिश्रा ने बताया कि छत की मरम्मत के लिए सूचना मुख्यालय भेज दी गई है।
बारिश से सड़कों की शामत
सीजन की शुरुआती बारिश क्या हुई कि सड़कों की शामत आ गई है। क्या हाईवे और क्या लिंक रोड सभी घटिया निर्माण की पोल खोलते हुए गड्ढे में तब्दील नजर आ रहे हैं। शहर से निकलते ही इलसिया के निकट से तो हाईवे के किनारे इतने बड़े-बड़े रेनकट हो गए हैं कि भारी से भारी वाहन उनमें समा जाएं।
इलसिया से पोस्टमार्टम हाउस जाने वाले मार्ग पर अभी दो दिन पहले ही मरम्मत कार्य कराया गया है। लेकिन इस सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। पोस्टमार्टम हाउस के निकट तो सड़क का एक बड़ा हिस्सा कट गया है। जिससे सड़क के बीच नाला नजर आने लगा है। इससे शव लेकर जाने वाले चौपहिया वाहनों को पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचने के लिए खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।