जान पर भारी, फिर भी मजबूरी नाव की सवारी
सीतापुर। बागपत जिले के काठा गांव के निकट गुरुवार को यमुना नदी में नाव पलटने से 19 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद जिले के गांजरी क्षेत्र के लोग भी दहशत में हैं।
इस क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक ऐसे गांव हैं, जहां के लोगों को प्रतिदिन अपनी छोटी-मोटी जरूरत का सामान लेने के लिए भी शारदा व घाघरा नदी जर्जर हो चुकी नावों से पार करनी पड़ती है।
बेहटा विकास खंड क्षेत्र में तकरीबन सीहपुर, पेरई, परेवा, नकहा समेत दो दर्जन के करीब ऐसे गांव हैं, जो शारदा नदी के उस पार बसे हैं। इन गांवों की प्रमुख बाजार कस्बा तंबौर है।
तंबौर में ही स्वास्थ्य केंद्र व थाना भी है। इस क्षेत्र के बाशिंदे वर्षों से नदी पर पुल बनने का इंतजार कर रहे हैं। यहां के निवासी मानपुर, बेबर, भभैंला, चंदीभानपुर व सेतुही घाट से नावों पर सवार होकर नदी पार करते हैं।
प्रतिदिन 1500 के आसपास संख्या में लोग नावों से नदी पार करते हैं। इस क्षेत्र के बाशिंदों का कहना है कि अगर वे नाव से नदी न पार करें तो सड़क मार्ग से 60 से 65 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी।
इससे बुरा हाल तो रेउसा क्षेत्र का है। इस क्षेत्र में रेती पुरवा, पचीसा व बरुआ बेहड़ गांव घाघरा नदी के बीच टापू पर बसे हुए हैं। इन गांवों की जरूरतें रेउसा कस्बा बाजार से पूरी होती हैं।
इन गांवों बसे लोगों का मुख्य कारोबार दूध पर निर्भर है। जिसकी वजह से प्रतिदिन इस क्षेत्र के बाशिंदों को घाघरा नदी पार करनी पड़ती है।
पचीसा गांव के रामसिंह, केशव, गुरुप्यारे, पेशकार, देशराज, मुरली, कृपाराम आदि ने बताया कि इस क्षेत्र की अधिकांश नावें जर्जर हैं। इनसे कभी भी हादसा हो सकता है।
गांव के बाशिंदे बहुत एहतियात बरतते हुए नदी पार करते हैं। उनका कहना है कि यदि टापू पर बसे परिवारों को इस पार लाकर बसा दिया जाए, तो जान जोखिम में डालकर नाव पर सफर करने की समस्या समाप्त हो जाए।