सीतापुर। जिले के 51 उच्च शिक्षण संस्थानों ने शिक्षण कार्य व छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए जरूरी ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजूकेशन (एआईएसएचई कोड) का वैलिडेशन नहीं किया है। इससे इन संस्थानों में पंजीकृत छात्रों की छात्रवृत्ति अटक सकती है। इस लापरवाही के कारण चिह्नित संस्थानों की एपीआई रिस्पांस यानि एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस की प्रक्रिया भी फंस सकती है।
प्रक्रिया के तहत संस्थान के प्रतिनिधि या प्राचार्य को समाज कल्याण दफ्तर आकर बॉयोमीट्रिक वेरीफिकेशन करवाना होता है। इसके बाद ही वह संस्थान में अध्ययनरत बच्चों की छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करवा सकते हैं। 152 में से 101 कॉलेजों ने सत्यापन की यह प्रक्रिया पूरी कर ली है जबकि 51 कॉलेेजों ने अब तक सत्यापन नहीं कराया है। ऐसे में यह कॉलेज समाज कल्याण विभाग की कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। इसकी सूचना शासन भेजी गई है।
क्या होता है कॉलेज एआईएसएचई कोड
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के लिए ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजूकेशन नवीन सत्र के लिए शुरू किया है। इस ऑनलाइन सर्वे के लिए सर्वप्रथम एआईएसएचई पोर्टल पर महाविद्यालय को रजिस्टर करवा कर एक कोड प्राप्त करना जरूरी होता है। यह एआईएसएचई कोड राज्य व केंद्र सरकार के छात्रवृत्ति पोर्टल पर नाम जोड़े जाने के लिए बेहद जरूरी है।
यदि एआईएसएचई कोड की वजह से कोई विद्यार्थी छात्रवृति से वंचित रह जाता है, तो उसकी सभी प्रकार की जिम्मेदारी संबंधित महाविद्यालय के प्राचार्य की होती है। कोड के बाद एपीआई इंटरफेस पर काॅलेज का नोडल अधिकारी बायोमेट्रिक सत्यापन करता है। इसके बाद वह अपने संस्थान के बच्चों को छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करवा सकता है।
25 नवंबर के बाद होगी कड़ी कार्रवाई
जिले के 51 कॉलेजों ने सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं कराई है। ऐसे में उन संस्थानों में अध्ययनरत छात्र छात्राओं की छात्रवृत्ति अटक का खतरा मंडराने लगा है। इन कॉलेजों को पत्र जारी कर 25 नवंबर तक का समय दिया गया है। यदि कॉलेज इस तिथि तक रिस्पांस नहीं करेंगे तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय की जाएगी।
- हर्ष मवार, जिला समाज कल्याण अधिकारी