महोली (सीतापुर)। बाघ के खौफ से किसान खेतों में तो बच्चे स्कूल जाने से कतरा रहे हैं। करीब 25 गांवों में बाघ की दहशत हैं। परिषदीय स्कूलों में 50 फीसदी छात्रों ने बाघ के डर से स्कूल जाना बंद कर दिया है। इन विद्यालयों के शिक्षक अभिभावकों से मिलकर बच्चों को स्कूल भेजने की गुजारिश कर रहे हैं। इसके बावजूद खौफजदा अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। वन दरोगा अक्षय पांडेय ने बताया कि बुधवार को कांबिग के दौरान कहीं पर भी ताजा पग चिन्ह नहीं मिले हैं।
उधर, वन विभाग की टीम बुधवार को भी बाघ की तलाश के लिए खेतों की खाक छानती रही। हालांकि बाघ का कोई सुराग टीम के हाथ नहीं लगा। पूरी कवायद कांबिंग व ग्रामीणों को जागरूक बनाने तक ही सीमित है। महोली इलाके की तराई में बाघ की सक्रियता बनी रहती है। सोमवार को पसिगवां में बाघ ने एक बैल का शिकार किया था। मंगलवार को फिर घटना स्थल पर पहुंचकर बैल को निवाला बनाया। चौव्वा बेगमपुर में ग्रामीण ने शावक संग बाघ को देखने का दावा किया था।
प्राथमिक विद्यालय रघुवर दयालपुर के प्रधानाध्यापक अनूप मिश्रा ने बताया कि स्कूल में 69 बच्चे पंजीकृत हैं। एक पखवाड़े पहले उपस्थिति 50 के पार हो जाती थी। बीते एक सप्ताह से सिर्फ 30-32 बच्चे ही पढ़ने आ रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय सीतारामपुर की प्रधानाध्यापिका आरती शुक्ला ने बताया कि बाघ की चहल कदमी के चलते छात्रों की उपस्थिति 40 से 50 फीसदी तक कम हुई है। बाघ की दहशत के कारण अभिभावक बच्चों को विद्यालय भेजने में कतरा रहे हैं।
देखभाल न होने से फसलों को भी नुकसान
श्यामजीरा निवासी किसान केदारी लाल ने बताया कि उन्होंने दो बीघा खेत में मूंगफली की फसल लगा रखी है, जो पककर तैयार हो गई है। खुदाई होनी है, लेकिन बाघ के भय के कारण खेत नहीं जा पा रहे हैं। इसी गांव के सुरेंद्र पाल की मूंगफली व तिलहन की फसल तैयार है। उन्हाेंने बताया कि बाघ के डर की वजह से फसल घर तक लाना मुश्किल हो रहा है।