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Sitapur News: शारदा नदी में समाए 50 बीघा खेत

Fri, 26 Jul 2024 02:54 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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तंबौर/रामपुर मथुरा। सरयू व शारदा नदियों का पानी स्थिर होने से बाढ़ का खतरा तो फिलहाल टल गया है लेकिन कटान का सिलसिला लगातार जारी है। सबसे अधिक कटान का खतरा देवपालपुर पर मंडरा रहा है।
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रामपुर मथुरा क्षेत्र में कई गांवों के आसपास पानी भरा होने से मुश्किलें कम नहीं हुईं हैं। लोगों को खाना बनाने से लेकर रोजमर्रा के जरूरी काम निपटाने में दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। उधर, बैराजों से बृहस्पतिवार को 3 लाख 35 हजार 826 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
तंबौर प्रतिनिधि के अनुसार शारदा नदी का जलस्तर घटने के साथ ही लहरों ने कटान तेज कर दी है। कोल्हुआ पुरवा और पास के गांव देवपालपुर में पिछले तीन दिनों में सोहन, दीपू, बालकृष्ण मौर्य, सालिगराम, कमलेश, संतराम, रामेश्वर, पुत्तीलाल, रामनरेश, सहजराम, बृजेंद्र सिंह व तंबौर निवासी पूर्व सांसद राजेश वर्मा सहित अन्य लोगों की करीब 50 बीघा खेत नदी की धारा में कट गए हैं। कटान थमते न देख ग्रामीणों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।
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ग्रामीणों का कहना है, कि गांव को कटान से बचाने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से बनाया गया करीब 200 मीटर बंधा क्षतिग्रस्त हो चुका है। अब कटान तेज होने से आबादी में बने मकानों की ओर धारा बढ़ रही है। आबादी से नदी महज 100 मीटर दूर है। कटान की रोकथाम नहीं की गई तो गांव में तबाही मच सकती है। हालांकि, सिंचाई विभाग की ओर से बालू की बोरियां डालकर बचाव कार्य कराए जा रहे हैं।
रामपुर मथुरा प्रतिनिधि के अनुसार सरयू नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार को 117.50 मीटर पर स्थिर रहा। पानी ठहरे रहने से समस्याएं भी कुछ कम हुई हैं। अखरी गांव के पास धीमी गति से कटान हो रहा है। दीपक ने बताया कि नदी प्रतिदिन कटान करती है। राजेश ने बताया कि मच्छर जनित बीमारियों के लिए छिड़काव की बहुत जरूरत है। प्रधान से कई बार कहा गया है, किंतु अब तक एक बार भी छिड़काव नहीं कराया गया है।


किस बैराज से छोड़ा गया कितना पानी
शारदा बैराज- 1,35,054 क्यूसेक
घाघरा बैराज- 1,31,478 क्यूसेक
बनबसा बैराज- 69,294 क्यूसेक




कटान रोकने के लिए लगा रहे बंबू क्रेट
किसी भी हालत में कोई मकान कटने नहीं दिया जाएगा। कटान रोकने के लिए बंबू क्रेट व गोपियन बोरियाें में बालू भरकर लगाई जा रही है। किनारों पर धारा का वेग कम करने का काम लगातार चल रहा है।
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- पुष्कर वर्मा, एसडीओ सिंचाई
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