रेउसा (सीतापुर)। जलस्तर में कमी आने के साथ घाघरा ने कटान तेज कर दी है। शनिवार को लगभग 50 बीघा खेती योग्य जमीन घाघरा निगल गई। कटान में तेजी आने से तटीय क्षेत्र के बाशिंदे दहशत में हैं। बिसवां तहसीलदार ने नदियों के तटवर्ती इलाके का दौरा किया।
फौजदारपुरवा के पास बनाए जा रहे बांस के अस्थायी बांध का काम सुस्त देख उन्होंने नाराजगी जताई। ठेकेदार को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। पिछले तीन दिनों से घाघरा व शारदा नदियों का जलस्तर धीमी गति से घट रहा है। दो दिनों तक जलस्तर स्थिर रहने से ग्रामीणों को कुछ राहत मिली थी।
शनिवार को पानी घटने से तेज हुई कटान को देखकर ग्रामीण चिंतित नजर आए। कटान के दौरान फौजदारपुरवा के हरिहर की 10 बीघा, जमींदार तथा भारत की 3-3 और निर्मल पुरवा के निर्मल दास की 5 बीघा समेत लगभग पचास बीघा खेती योग्य जमीन घाघरा में समा गई।
संपर्क मार्गों पर भरा पानी भी कुछ कम हुआ है। लेकिन अभी ग्रामीणों की मुसीबतें बरकरार हैं। उन्हें पानी से होकर आवागमन करना पड़ा है। ग्रामीणों की मानें तो जलस्तर लगातार कम-ज्यादा हो रहा है। इसलिए बाढ़ का खतरा टला नहीं है। किसी भी वक्त बैराजों से छोड़े जाने वाले लाखों क्यूसेक पानी के कारण नदियों उफना सकती हैं।
इसे लेकर तटीय क्षेत्र के ग्रामीण भयभीत हैं। बिसवां तहसीलदार राजकुमार गुप्ता ने फौजदार पुरवा, कोनी, चहलारी घाट का जायजा लिया। फौजदारपुरवा के पास बनाए जा रहे बांस के अस्थाई बांध का काम सुस्त देख नाराजगी जताई। ठेकेदार को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।
बिसवां तहसीलदार ने शनिवार को काशीपुर-मल्लापुर में बनाए जा रहे बांध का निरीक्षण किया। यहां ग्रामीणों ने संक्रामक रोग फैलने की बात कहते हुए चिकित्सा सुविधा न मिलने तथा बाढ़ राहत चौकी व स्वास्थ्य शिविरों के नदारद होने की शिकायत की। इस पर तहसीलदार ने उच्चाधिकारियों को हालातों की जानकारी देते हुए जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त कराए जाने का आश्वासन दिया।