सीतापुर। ग्राम पंचायत सकरन में विकास कार्याें में 48 लाख 54 हजार 970 रुपये के भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई है। जिलाधिकारी डॉ राजा गणपति आर ने भ्रष्टाचार की दोषी प्रधान संतोषी देवी के अधिकार सीज कर दिए हैं। साथ ही प्रधान व सचिव अर्पित गुप्ता और सहायक विकास अधिकारी (आईएसबी) जितेंद्र कुमार रस्तोगी पर एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया है। तीनों से इस धनराशि की वसूली भी की जाएगी।
डीपीआरओ डॉ. निरीश चंद्र साहू ने बताया कि सकरन ग्राम पंचायत निवासी रामचंद्र व अन्य ने शपथ पत्र देकर 22 मई 2024 को प्रधान संतोषी देवी पर विकास कार्याें में वित्तीय अनियमितताएं करने का आरोप लगाया था। इस संबंध में शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में एक रिट भी दायर की। इस पर 22 जून 2024 को उन्हें जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। इस ग्राम पंचायत में वर्ष 2016 से 2022 तक सचिव अर्पित गुप्ता तैनात रहे थे।
शिकायत की जांच के दौरान कुल 80 लाख 63 हजार 921 रुपये के विकास कार्यों के सापेक्ष उन्हें कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया। इस पर तीनों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। इस मामले की अंतिम जांच रिपोर्ट में प्रधान संतोषी देवी पर 18 लाख 55 हजार 760 रुपये गबन का आरोप सही पाया गया। उनके अधिकार सीज करते हुए उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया है। वहीं, तत्कालीन सचिव अर्पित गुप्ता पर 24 लाख 27 हजार 485 रुपये के गबन और सहायक विकास अधिकारी (आईएसबी) जितेंद्र कुमार रस्तोगी पर 5 लाख 71 हजार 725 रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। इन दोनों पर भी एफआईआर दर्ज कराने का डीएम डॉ राजा गणपति आर ने आदेश दिया है।
एफआईआर दर्ज होने के साथ होगी रिकवरी
डीएम ने प्रधान, सचिव व एडीओ आईएसबी पर एफआईआर के आदेश दिए हैं हैं। तीनों से सरकारी धन की रिकवरी भी कराई जाएगी। इस मामले में प्रधान को उनके पद से हटा दिया गया है। विधिक कार्रवाई की जा रही है। - डॉ. निरीश चंद्र साहू, डीपीआरओ सीतापुर