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Sitapur News: बैराजों से छोड़े गए 4.16 लाख क्यूसेक पानी ने बजाई खतरे की घंटी

Wed, 21 Aug 2024 11:42 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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रामपुर मथुरा (सीतापुर)। गांजरी इलाके में एक बार फिर से बाढ़ के हालात पैदा हो गए हैं। बुधवार को बैराजों से छोड़े गए 4,16,303 क्यूसेक पानी ने तराई क्षेत्र में खतरे की घंटी बजा दी है। इससे गांजर के लोगों की धड़कनें बढ़ गईं हैं। सरयू का जलस्तर बुधवार को 117.50 मीटर दर्ज किया गया। मंगलवार की तुलना में पानी 10 सेमी बढ़ा है।
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बैराजों से डिस्चार्ज पानी देर रात तक शारदा और सरयू नदी में पहुंचने से जलस्तर बढ़ने होने का अनुमान है। नदियों के उफनाने से बाढ़ का संकट लोगों के सामने खड़ा हो सकता है। परमगोंडा में चार दिनों के अंतराल में चार आशियाने सरयू में समा गए। एक घर लहरों के निशाने पर है। शंकरपुरवा गांव का अस्तित्व मिटने की कगार पर है। यहां अब सिर्फ एक मकान बचा है।
पिछले कुछ दिनों से तराई इलाके में नदियां शांत थी, इससे गांजर के लोग सुकून में थे, लेकिन बाढ़ का खतरा बरकरार था। बीते दो दिनों से हालात फिर से बिगड़ने लगे हैं। बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने से नदियों का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है। बुधवार को बनबसा, शारदा और गिरिजा बैराजों से 4 लाख 16 हजार 303 क्यूसेक पानी तराई इलाके में शारदा और सरयू नदी में छोड़ा गया है।
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हालांकि, यह पानी अभी तक गांजर में नहीं पहुंचा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि बैराजों से छोड़ा गया पानी रात 12 बजे तक शारदा और सरयू नदी में आ जाएगा, इसके बाद नदियों के उफनाने से गांजर में बाढ़ के हालात नजर आ सकते हैं।
हालांकि, जिम्मेदार बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं होने की बात कह रहे हैं। जलस्तर बढ़ने के बाद भी कटान में कमी नहीं आई है। बताते हैं कि परमगोंडा में चार दिनों के दरम्यान श्यामा, जगतराम, शिवराम व इंदल के घर कटकर सरयू में समा गए हैं।
प्रमोद का घर नदी की धारा से 4 मीटर की दूरी पर है। शंकरपुरवा में विभावती का मकान ही बचा है। गांव का अस्तित्व संकट में है। पानी के बहाव में अखरी के पास तटबंध के करीब निरंजन पुरवा से बंधे पर जाने वाला मार्ग तथा प्यारे पुरवा से बंधे पर जाने वाली सड़क कट गई है। स्कूली बच्चों तथा राहगीरों को करीब एक किलोमीटर बंधे से घूम कर जाना पड़ रहा है ।


कटान पीड़ितों को दिलाया जाएगा मुआवजा
कटान पीड़ितों को मुआवजा दिलाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। सरयू का जलस्तर काफी कम होने से अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं। यदि पानी बढ़ने पर बाढ़ के हालात बनेंगे तो जरूरी सुविधाएं व राहत लोगों को मुहैया कराई जाएगी। तराई क्षेत्र में टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
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-शिखा शुक्ला, एसडीएम महमूदाबाद
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