जिले में भारी ओलावृष्टि से दिखा शिमला व मनाली सरीखा नजारा
सीतापुर/लहरपुर। जिले में बेमौसम बारिश के बीच बुधवार की रात आसमान से ओले बनकर बरसी आफत ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। भारी ओलावृष्टि के बाद खेतों से लेकर सड़कों तक बर्फ की बिछ गई सफेद चादर ने शिमला और मनाली के नजारे का अहसास करा दिया। खेतों में तैयार आलू, सरसों, मटर, गेहूं, केला व आम की फसल ओलावृष्टि से बर्बाद हो गई।
कुदरत की मार से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। कृषि विभाग नुकसान का आंकलन कराने में जुट गया है। पिछले पन्द्रह दिनों से मौसम का मिजाज समझ से परे है। कभी दिन में चटख धूप गर्मियों के सीजन के आगाज का अहसास कराने लगती है, तो किसी दिन बारिश व तेज हवा के कारण ठंड फिर लौट आती है।
मंगलवार की रात से बदले मौसम के तेवर बुधवार की रात इस कदर तल्ख हुए कि जिले के कई इलाकों में भारी ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि के दौरान यातायात ठप हो गया। कमलापुर, मानपुर, बिसवां, लहरपुर, तालगांव, हरगांव व परसेंडी इत्यादि क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि के बाद खेतों, सड़कों व घरों की छतों पर बर्फ की सफेद चादर बिछी नजर आई।
ओलावृष्टि के कई घंटे बाद तक हर तरफ बर्फ दिखाई दे रही थी। ओले गिरने से आलू, सरसों, मटर, गेहूं, केला व आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। मेहनत से उगाई गई फसल पर कुदरत की मार से किसान बेहद मायूस हैं।
गेहूं की फसल धराशाई
गेहूं की फसल में बालियां आने लगी थीं। ओलावृष्टि से 15 बीघा गेहूं की फसल खेत में धराशाई हो गई है। फसल गिरने से सड़ने का खतरा भी पैदा हो गया है। उपज अब नाममात्र की होगी।
-दिनेश पटेल, किसान
बर्बाद हो गई केले की फसल
पारंपरिक खेती से अलग हटकर व्यावसायिक खेती में हाथ आजमाने के लिए पांच बीघा केला की फसल लगाई थी। ओलावृष्टि से अब सारी फसल तबाह हो गई। लागत भी नहीं निकलेगी।
-सुनील वर्मा, किसान
आम का बौर ही नहीं पत्तियां तक गिर गई
ओलावृष्टि से आम की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। कई इलाकों में आम का बौर ही नहीं पत्ते तक गिर गए हैं। बागबान गुड्डू और रामजीवन ने बताया कि कुदरत की इस मार से उबर पाना मुमकिन नहीं है। भारी ओलावृष्टि के बाद फिर से आम के पेड़ों में बौर आने की गुंजाइश कम ही है।
आंकलन कराया जा रहा
जिले के परसेंडी, लहरपुर व हरगांव इलाके से ज्यादा नुकसान की सूचना है। आंकलन कराया जा रहा है। एक-दो दिन में रिपोर्ट मिलेगी। नुकसान के आधार पर किसानों की क्षतिपूर्ति के लिए बीमा कंपनी को पत्र लिखा जाएगा।
-अखिलानंद पांडेय, जिला कृषि अधिकारी