खाद्य पदार्थों में मिलावट करना दो व्यापारियों को महंगा पड़ गया। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में रस्क व आइस कैंडी के नमूने अधोमानक मिले थे। जिस पर अपर जिलाधिकारी न्यायालय में वाद दायर कराया था।
कोर्ट ने दोनों व्यापारियों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। वहीं तीन व्यापारियों पर बिना पंजीकरण के कारोबार करने व हिदायत के बावजूद पंजीकरण न कराने पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने दिसंबर 2014 में महोली के उरदौली स्थित रामकृष्ण वर्मा के यहां छापा मार रस्क का नमूना भरा। जांच में नमूना अधोमानक मिला। पैकेजिंग नियमों का उल्लंघन था। पैकेट पर नेट वेट, बैच नंबर व पैकिंग नंबर व पंजीकरण नहीं था।
इसी प्रकार मिश्रिख में स्टेशन रोड़ के निकट वेदकांत गुप्ता की दुकान से आइस कैंडी का मई 2012 में नमूना भरा गया था। जांच में यह अधोमानक मिला। इसमें स्टार्च की मिलावट मिली। जबकि स्टार्च नहीं होना चाहिए।
इन मामलों को अपर जिलाधिकारी न्यायालय/न्याय निर्णायक अधिकारी के वाद दायर कराया गया था। जिस पर न्यायालय ने दोनों मामलों में व्यापारियों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। इसी प्रकार खाद्य सुरक्षाधिकारी करूणा शंकर कामले ने दिसंबर 2014 जहांगीराबाद में बड़ा चौराहा सब्जी मंडी में शकील अहमद के यहां छापा मारा।
यह फल का कारोबार करते थे, लेकिन पंजीकरण नहीं था। नोटिस जारी किया गया लेकिन समय सीमा निकल जाने के बाद भी ध्यान नहीं दिया। इसी प्रकार महमूदाबाद के पैतेंपुर में किराना व्यापारी युसूफ अपना टर्नओवर चार से पांच लाख बताते हैं, लेकिन पंजीकरण नहीं मिला।
रेउसा इलाके में फल व सब्जी के व्यापारी जमाल अहमद ने भी हिदायत के बावजूद पंजीकरण नहीं कराया। जिस पर इन तीनों मामलों में खाद्य सुरक्षाधिकारी करूणा शंकर कामले ने न्यायालय में वाद दायर कराया था। न्यायालय ने व्यापारियों के खिलाफ दस-दस हजार का जुर्माना लगाया है।