सीतापुर। परिजनों और रिश्तेदारों के नाम से फर्म बनाकर मनरेगा के सामग्री अंश का काम और भुगतान लेने का एक और मामला अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया है। इस बार तो पंचायत राज विभाग के अधीन हरगांव ब्लॉक में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर ने अपने ही नाम से पंजीकृत फर्म पर सामग्री अंश का भुगतान ले लिया। अलग अलग ग्राम पंचायतों से लगभग 40 लाख रुपये का भुगतान चालू वित्तीय वर्ष अब तक इस फर्म को किया जा चुका है।
मनरेगा से होने वाले विकास कार्यों में दो अंश होते हैं। सामग्री अंश और श्रमांश। विकास कार्यों में मजदूरी पर खर्च होने वाले रुपयों का भुगतान श्रमांश से किया जाता है। निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का भुगतान सामग्री अंश से होता है। सामग्री की खरीद के लिए फर्म मनरेगा की वेंडर्स लिस्ट में पंजीकृत की जाती है।
शासन के निर्देश हैं कि जनप्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों की या इनके रिश्तेदारों की फर्म वेंडर्स लिस्ट में न शामिल की जाएं। इन्हें कोई कार्य न देने और भुगतान न करने के भी निर्देश हैं। बावजूद इसके जनपद में बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों की फर्मों को काम और भुगतान दिया जा रहा है।
हरगांव विकास खंड में पंचायत राज विभाग के अधीन कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर सतेंद्र शुक्ला की तैनाती है। सतेंद्र की एक फर्म मां अन्नपूर्णा ट्रेडर्स के नाम से मनरेगा की वेंडर्स लिस्ट में फीड है। सूत्रों के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष में अलग अलग ग्राम पंचायतों से लगभग 40 लाख रुपये का भुगतान कंप्यूटर ऑपरेटर की फर्म को किया गया है। यह हाल तब है जबकि आए दिन डीएम, सीडीओ फर्मों का सत्यापन करने के निर्देश दे रहे हैं।
अमर उजाला की पड़ताल में एक और जानकारी मिली। उक्त फर्म को काम और भुगतान दिलाने में एक ग्राम सचिव की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उक्त ग्राम सचिव के पास जो ग्राम पंचायतें हैं, उन्हीं से सबसे ज्यादा भुगतान उक्त फर्म को किया गया है। स्थानीय स्तर पर चर्चा यहां तक है कि कंप्यूटर ऑपरेटर की संबंधित फर्म में उक्त ग्राम सचिव साइलेंट पार्टनर भी है।