बजट के फेर में दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना अधर में है। योजना में चार हजार गांव अंधेरे में है। योजना में जिले के साढ़े छह हजार गांव चयनित हुए थे लेकिन अब तक महज 1700 गांवों में ही उजियारा पहुंच सका है। करीब चार हजार से अधिक गांव विद्युतीकरण की बांट जोह रहे हैं।
सीतापुर जिले में हजारों गांव ऐसे हैं, जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंच सकी है। विद्युतीकरण योजना में 6254 गांव चयनित हुए थे। इस पर तकरीबन 298.67 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। काम दिसंबर 2017 तक पूरा होना है लेकिन अभी तक मज 1700 गांवों में ही बिजली पहुंच सकी है।
इस प्रोजेक्ट में शासन ने लक्ष्य के सापेक्ष करीब 40 करोड़ रुपये अवमुक्त किए थे। बजट आवंटन के बाद कॉर्पोरेशन ने दो कार्यदायी संस्थाएं जैक्शन व केईआई चयनित की थी। आवंटित बजट से महज 1760 गांवों में ही बिजली आ सकी है। 4494 गांव विद्युतीकरण की राह तक रहे हैं।
इन गांवों में विद्युतीकरण में देरी की वजह पावर कॉर्पोरेशन बजट का अभाव बता रहा है। बजट की कमी से इन गांवों विद्युतीकरण कार्य पूरी तरह से ठप पड़ा है। शायद यही वजह है कि चयनित गांवों में अब तक बिजली नहीं पहुंची है। जिस कारण यहां के बाशिंदों ढिबरी की रोशनी में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।