नोट बंदी से करीब 35 कर्मचारियों के सैलरी व पेेंशन निकासी में दिक्कत आ गई है। कर्मचारियों का वेतन बृहस्पतिवार से मिलना शुरू हो जाएगा। आरबीआई के प्रतिबंध व बैंक की बाध्यता की वजह से वेतन अकाउंट में आने के बाद भी लोग मनचाही निकासी नहीं कर सकेंगे।
ऐसे में कर्मचारियों व पेंशनधारकों को परिवार का खर्च चलाने के लिए प्लान तैयार करना पड़ रहा है। कर्मचारियों को कुछ कार्य रोकने पड़ रहे हैं। हालांकि कर्मचारियों ने नोटबंदी को सरकार का अच्छा कदम बताया, लेकिन अपने अकाउंट से निकासी की सीमा तय करने से परेशानी होने की भी बात कही।
जिले में करीब 13 हजार पेंशनधारक व करीब 35 हजार कर्मचारी हैं। इसके अलावा निजी कंपनियों में करीब 11 हजार के आसपास कर्मचारी तैनात हैं। इन कर्मचारियों को विभिन्न बैंकों से पेंशन व वेतन मिलता है। बृहस्पतिवार से वेतन और पेंशन खातों में पहुंचने लगेगी।
ऐसे में आरबीआई के प्रतिबंध व बैंक की निकासी सीमा की वजह से कर्मचारी व पेंशनर मनचाही रकम नहीं निकाल सकेंगे। आंकड़ों पर नजर डालें तो आरबीआई के निर्देशों के अनुसार एक हफ्ते में 24 हजार रुपये निकाले जा सकते हैं लेकिन बैंकों के पास इतना कैश भी नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों को तनख्वाह कैश में निकालने में दिक्कतें आएंगी।
बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सारा संकट नकदी की कम सप्लाई से है। अगर कैश की पूरी सप्लाई हो तो चार हफ्ते में खाता धारक 96,000 रुपये निकाल सकते हैं, लेकिन केंद्र सरकार ऑनलाइन पेमेंट और ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने का तर्क देकर कम कैश भेज रही है। इससे दिक्कतें आ सकती हैं।
जरूरत के मुताबिक नहीं मिल रही करेंसी
एलडीएम सिद्धार्थो पाल ने बताया कि बैंकों को आरबीआई की ओर से जरूरत के मुताबिक करेंसी नहीं मिल पा रही है। हालांकि बैंक की ओर से एक सप्ताह में अधिकतम 24 हजार रुपये की निकासी की जा सकती है। इसके लिए सरकारी कर्मचारियों को दो शिफ्ट में धन की निकासी करने की सहूलियत दी गई है। सीमित कैश होने के चलते एक बार में पूरा पैसा नहीं निकाला जा सकता है।