दरअसल, इस बार पंचायत चुनाव में जहां विजयी हुए युवा प्रधानों की संख्या में इजाफा हुआ है। वहीं शिक्षित प्रत्याशियों के विजयी होने का आंकड़ा भी पहले की अपेक्षा ज्यादा हुआ है, जिससे उम्मीद लगाई जा रही है कि पढ़े-लिखे प्रधान गांवों को सजाने संवारने में रुचि लेंगे।
इससे न सिर्फ गांवों का विकास होगा, बल्कि शिक्षा, खेल आदि का भी विकास होगा। यदि इस बार जिले के 1596 गांवों में चुनी जाने वाली नई सरकार में पढ़े-लिखे प्रधानों की संख्या पर गौर करें तो बीती पंचवर्षीय से इस बार की तुलना ज्यादा पढ़े लिखे लोग चुनाव जीते हैं।
बीती पंचवर्षीय में जिले में करीब 20 प्रतिशत ही ऐसे प्रधान विजयी हुए थे, जो पढ़े लिखे थे। लेकिन इस बार यह ग्राफ 20 से बढ़कर 35 प्रतिशत पहुंच गया है। पढ़े-लिखे प्रधानों में युवाओं की संख्या ज्यादा है। 1596 सीटों में से 650 ग्राम पंचायतों में युवाओं का कब्जा है। इनमें से 90 फीसदी युवा पढ़े लिखे हैं।
पढ़े लिखे प्रधानों की संख्या में करीब 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। पंचायत चुनाव के नतीजे खुद गवाही दे रहे हैं कि अब शिक्षित लोगों का रुझान गांवों की राजनीति की ओर बढ़ रहा है। इससे गांव में विकास कार्य परवान चढ़ेंगे। लोगों का कहना है कि पंचायत चुनाव में शिक्षित लोगों की बढ़ती भागीदारी शुभ संकेत हैं। ये विकास व प्रगति की निशानी हैं।