बजट खपाने को रविवार को भी खुले रहे दफ्तर
सीतापुर। वैसे तो 31 मार्च को सन-डे था, इस लिहाज से सरकारी दफ्तरों में छुट्टी थी। मगर चालू वित्तीय वर्ष का अंतिम दिन होने से ये दिन काफी महत्वपूर्ण था। यही नहीं नौकरशाही के लिए ये दिन ‘मार्च महोत्सव’ जैसा रहा। बजट खर्च करने के लिए अधिसंख्य दफ्तर खुले थे।
वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन 31 मार्च को अफसर-कार्मिक देर रात तक बजट खर्च करने में मशगूल दिखे। बकाया बजट का हिसाब-किताब बराबर करने में तेजी से काम किया गया।
जिन विभागों को बजट खर्च करना बाकी था, उनके अफसर-कार्मिकों के माथे पर सिलवटें साफ दिखाई दीं। जबकि सौ फीसदी बजट खर्च करने वाले विभागों ने कार्यालयों में तालाबंदी कर सन-डे का इंजॉय किया।
अमर उजाला टीम ने रविवार को विकास भवन के सरकारी कार्यालयों का जायजा लिया तो जिला ग्राम्य विकास अभिकरण विभाग में परियोजना निदेशक राकेश पांडेय समेत लिपिक अपने-अपने पटलों पर बैठकर फाइलें निपटाते दिखे।
जिला विकास अधिकारी राकेश कुमार भी अपने चैंबर में बजट खपाने में मशगूल नजर आए। इसी तरह जिला पंचायतराज अधिकारी कार्यालय में भी डीपीआरओ आईके सिंह समेत बाबू फाइलों को निपटाते दिखे।
समाज कल्याण विभाग में भी अफसर सुधांशु शेखर कर्मचारियों से गुफ्तगू कर बजट की फाइलें निपटाते दिखे। माध्यमिक शिक्षा विभाग में डीआईओएस नरेंद्र शर्मा व बाबू अश्वनी कुमार समेत अन्य कर्मचारी फाइलें निस्तारित करने में जुटे थे। इसके अलावा बेसिक शिक्षा विभाग में भी बीएसए अजय कुमार समेत लिपिक भी पटलों पर बैठकर फाइलें निपटाने में जुटे रहे।