80 बीघा खेती नदी में समाई
सीतापुर। जिले के गांजर इलाके में बाढ़ की मुसीबत अभी टलती नजर नहीं आ रही है। शारदा व घाघरा नदी के जलस्तर में कमी तो आई है, लेकिन बाढ़ का पानी पूरी तरह से कम नहीं हुआ है। तमाम रास्ते व गांव अब भी बाढ़ की चपेट में हैं।
पानी घटते ही नदियों ने कटान तेज कर दी है। रविवार को एक झोपड़ी व 80 बीघा खेत कटकर नदी में समा गए। उधर शारदा व घाघरा बैराजों से रविवार को पौने तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे बाढ़ की मुसीबत आने वाले दिनों में भी बनी रहने की आशंका है।
तंबौर इलाके में बाढ़ का पानी लगातार फैलता जा रहा है। इस क्षेत्र में करीब 56 गांव बाढ़ की जद में हैं। क्षेत्र के तमाम संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में हैं। वहीं रविवार को शारदा नदी के जलस्तर में मामूली गिरावट देखने को मिली है।
मगर बाढ़ का पानी अभी भी आबादी व मार्गों पर भरा है। उधर, रेउसा इलाके में घाघरा नदी का कहर जारी है। यहां भी नदी के जलस्तर में गिरावट देखने को मिली है। लेकिन बाढ़ का पानी अभी हटा नहीं है।
क्षेत्र के भदम्मर पुरवा में नदी तेजी से कटान कर रही है। गांव के जाबिर की झोपड़ी कटकर घाघरा नदी में समा गई। हालांकि जाबिर अपने परिवार समेत पहले ही झोपड़ी खाली कर चुका था।
गांव के ही सुनील, जगत नारायन, ग्राम प्रधान जगदीश, हामिद, रघुनंदन, खेलावन आदि किसानों की 80 बीघा खेती कटकर नदी में समा गई है। इस क्षेत्र के कई गांव अब भी बाढ़ की जद में हैं।
खेत, खलिहान, चारागाह व कई मार्ग बाढ़ के पानी में डूबे हैं। बाढ़ का पानी कम तो हुआ है मगर बाढ़ की मुसीबत अभी टली नहीं है। जैतहिया, चहलारी, रामलाल पुरवा आदि सरकारी स्कूलों में बाढ़ का पानी खत्म हो गया है।
हालांकि स्कूलों के आसपास अब भी बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा है। उधर फौजदार पुरवा के सरकारी स्कूल जाने वाले मार्ग पर बाढ़ का पानी भरा है। ऐसे में बच्चों को स्कूल जाने में दुश्वारी हो रही है।
रविवार को शारदा व घाघरा बैराजों से दो लाख 86 हजार 440 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस पानी से हाल फिलहाल बाढ़ग्रस्त इलाके से मुसीबत टलती नजर नहीं आ रही है।