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सात घर घाघरा में समाए, 33 बीघा खेती कटकर बही

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सात घर घाघरा में समाए, 33 बीघा खेती बही
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विकराल हो रही घाघरा, बढ़ता जा रहा जलस्तर

रेउसा (सीतापुर)। बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी से लगातार नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। इससे घाघरा कटान कर रही है। गुरुवार रात सात घर कटकर घाघरा में समा गए। जबकि 33 बीघा खेती योग्य भूमि कटकर नदी में बह गई है। उधर, बैराजों से सवा तीन लाख क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। इससे गांजर में स्थिति भयावह हो रही है।
इन दिनों घाघरा नदी म्योड़ी छोलहा गांव के समीप जबरदस्त कटान कर रही है। गुरुवार रात गांव के राम मोहन, अजीज, अनिल, कमलेश, बालकराम, रामलाल व सहजराम के घर कटकर नदी में समा गए। परमेश्वरपुरवा गांव व निकट खेतों में भी कटान हो रही है। गांव के फौजदार, निर्मल, भगौती, गयादीन, हरिश्चंद, रामचंद्र, राम अचल, लीलावती, परमेश्वर की 33 बीघा खेती नदी में समा गई। इसके अलावा गांव के फौजदार, परमेश्वर, सियाराम, पेशकार, भगौती, सत्यपाल आदि के घर कटान के मुहाने पर हैं। पचीसा टापू पर भी नदी कटान कर रही है। यहां के बाशिंदे झोपड़ियों को ऊंचे स्थान पर पहुंचा रहे हैं। तटीय क्षेत्र में जिन 22 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचा है, वहां लगातार जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है। तमाम झोपड़ियों के भीतर बाढ़ का पानी घुस गया है। इस क्षेत्र के सैकड़ों बीघा खेत जलमग्न हैं। आवागमन के लिए लोगों को नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। खेतों से लेकर गांव तक आवागमन का प्रमुख साधन नाव बन गई है। बाढ़ पीड़ितों की माने तो बीते 24 घंटों में बाढ़ ग्रस्त इलाके में करीब 1 फीट ऊंचाई तक बाढ़ का पानी बढ़ा है। उधर शारदा, घाघरा व बनबसा बैराजों से गुरुवार को 320187 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस वजह से राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। लगातार बढ़ते जलस्तर व कटान को देखकर तटीय क्षेत्र के बाशिंदे भयभीत हो रहे हैं। हालांकि प्रशासन हर संभव मदद के दावे कर रहा है।
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सड़ने लगी फसलें
रेउसा क्षेत्र का बड़ा इलाका बाढ़ की चपेट में है। हजारों बीघा खेती बीते एक सप्ताह से बाढ़ के पानी में डूबी हुई है। अब हालत ये है कि धान की फसल समेत अन्य फसलों के पौध सड़ने लगी है। गन्ने की फसल को भी अधिक पानी से नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि अगर इसी तरह से खेत पानी में समाए रहे तो फसल का बर्बाद होना तय हैं।
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खत्म होने लगा राशन
घरों में रखा हुआ राशन अब खत्म होने लगा है। ग्रामीणों की माने तो यह पूरा क्षेत्र किसानी व मजदूरी पर ही निर्भर है। घरों में दो चार दिन का ही राशन बमुश्किल जुटा पाते हैं। हालत यह है कि एक सप्ताह से पूरा इलाका बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। जिसकी वजह से बाढ़ पीड़ित परिवारों के घरों में रखा हुआ राशन भी खत्म होने लगा है। इस क्षेत्र में प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई राहत सामग्री नहीं बांटी गई है।
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बाढ़ राहत चौकी तैयार नहीं
कहने को तो मारूबेहड़ में बाढ़ राहत चौकी बनाई गई, लेकिन अभी तक इस चौकी को दुरुस्त नहीं किया जा सका है। हालांकि तहसील के अधिकारी बार बार चौकी को दुरुस्त करने के लिए अधीनस्थों को निर्देश दे रहे हैं।
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पुलिया नहीं हुई दुरुस्त
बाढ़ की वजह से गुरगुचपुर गांव के निकट कटकर बह जाने वाली पुलिया को एक सप्ताह बाद भी दुरुस्त नहीं कराया जा सका है। जिसकी वजह से इस क्षेत्र के 20 गांवों का आवागमन अब भी प्रभावित है। इस क्षेत्र के बाशिंदों को काफी चक्कर लगाकर व बाढ़ के पानी से गुजरकर कस्बा मारू बेहड़ व रेउसा बाजार जाना पड़ रहा है।
बैराजों से छोड़ा गया पानी
घाघरा बैराज 159570 क्यूसेक
शारदा बैराज 84285 क्यूसेक
बनबसा बैराज 76332 क्यूसेक
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