सीतापुर। यूपी बोर्ड परीक्षा के केंद्र निर्धारण में जमकर मानकों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। बालकों को 30 किलोमीटर तो बालिकाओं को 20 किलोमीटर दूर भेज दिया गया है। यह एक दो विद्यालय की समस्या नहीं है। 15 से अधिक विद्यालयों की दूरी मानक से काफी अधिक तय कर दी गई है। इतनी अधिक दूरी व खराब रास्तों पर विद्यार्थियों को समय से परीक्षा केंद्र पर पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
कॉलेज प्रबंधक केंद्र निर्धारण की लिस्ट देखकर दंग रह गए हैं। अब वह इन केंद्रों पर आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा को लेकर शासन ने 153 अनंतिम रूप से परीक्षा केंद्र निर्धारित कर दिए हैं। जिसमें 18 राजकीय, 44 अशासकीय सहायता प्राप्त व 91 वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों को केंद्र बनाया गया है। बुधवार को इन केंद्रों की सूची जारी कर दी गई है। सूची सार्वजनिक होते ही तमाम खामियां उजागर हुई हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग के मुताबिक बालकों का सेंटर 10 किलोमीटर बनाया जाएगा।
अपरिहार्य स्थिति में इसे बढ़ाकर 15 किलोमीटर किया जा सकता है। लेकिन पहले प्राथमिकता 10 किलोमीटर ही होगी। इसी प्रकार बालिकाओं का सेंटर पांच किलोमीटर की परिधि में बनाया जाएगा। अगर इस परिधि में कोई कॉलेज नहीं मिलता है तो इसे बढ़ाकर 8 किलोमीटर किया जा सकता है। लेकिन केंद्र निर्धारण में इन मानकों का ख्याल ही नहीं रखा गया है। कहीं बालिकाओं को 20 किलोमीटर तो कही बालकों को 30 किलोमीटर भेज दिया गया है। वह भी कई ऐसे विद्यालयों को सेंटर बना दिया गया है, जहां पर पहुंचने का संपर्क मार्ग बहुत ही खराब है। सुरक्षा की दृष्टि से भी यह विद्यालय ठीक नहीं है। इन हालातों में बोर्ड परीक्षार्थियों को यहां तक पहुंचने में काफी दुश्वारियां उठानी पड़ेगी।
केंद्र पर क्षमता से अधिक बच्चे देेंगे परीक्षा
बाबूराम सावित्री देवी इंटर कॉलेज शेखपुर की क्षमता 600 विद्यार्थियों की है लेकिन यहां पर 1127 विद्यार्थी भेज दिए गए है। मां शुकुली देवी इंटर कॉलेज बाबाकुटी की क्षमता 600 है, यहां पर 1187 विद्यार्थियों को भेजा गया है। संजू प्रजापति स्मारक इंटर कॉलेज सेमरी की क्षमता 700 की है, यहां पर 1082 विद्यार्थियों को भेजा गया है। हनुमत रामेश्वर दयाल इंटर कॉलेज की क्षमता 600 की है, लेकिन यहां पर 907 विद्यार्थियों को भेजा गया है।
हवाई दूरी बन रही बाधा
स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि परीक्षा केंद्र का निर्धारण अक्षांतर व देशांतर दूरी के माध्यम से किया जा रहा है। अक्षांतर व देशांतर में हवाई दूरी नापी जाती है। विद्यालय पहुंचने का रास्ता नहीं देखा जाता है। इसी वजह से यह दिक्कतें आ रही है। अक्षांतर व देशांतर से वास्तविक दूरी में करीब 20 किलोमीटर का अंतर आता है। माध्यमिक शिक्षा विभाग को इस मानक को बदल देना चाहिए। वास्तविक मार्गों की दूरी देखकर ही केंद्र बनाए जाए, जिससे यह समस्या दूर हो सकें।
बाबा बालकराम इंटर कॉलेज गोंडा देवरिया के आस पड़ोस एक भी इंटर कॉलेज नहीं है। इस विद्यालय की 50 बालिकाओं का सेंटर जीआईसी दैमलपुर रामपुर मथुरा भेजा गया है। जबकि यह विद्यालय गोंडा देवरिया से करीब 18 किलोमीटर दूर है। इसी कॉलेज के 37 बालकों का सेंटर 30 किलोमीटर दूर बेनीराम इंटर कॉलेज पैतेंपुर को भेज दिया गया है। 42 बालकों का सेंटर जीआईसी बांसुरा करीब 20 किमी दूर भेजा गया है। ऐसे में समय से पहुंचना भी बच्चों के सामने एक चुनौती है।
जय भारत इंटर कॉलेज सेमरी की 62 बालिकाओं का सेंटर राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय मुर्तजानगर को भेजा गया है। जबकि यह जय भारत इंटर कॉलेज से करीब 13 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा मुर्तजानगर कॉलेज जंगलों में बना हुआ है। यहां तक जाने का संपर्क मार्ग भी दुरुस्त नहीं है। ऐसे में सुबह जब बालिकाएं परीक्षाएं देने जाएंगी तो उनको काफी दिक्कतें आएंगी। इसी कॉलेज के 58 बालकों का सेंटर बेनीराम इंटर कॉलेज पैतेंपुर में करीब 18 किलोमीटर दूर भेज दिया गया है।
पंडित संतोषीलाल मेमोरियल इंटर कॉलेज चांदपुर की 66 बालिकाओं का सेंटर राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय मुर्तजानगर को भेजा गया है। यह सेंटर करीब 16 किलोमीटर दूर है। यह दूरी मानकों से दोगुनी है। बालिकाओं को सुबह के समय खराब रास्तों से सेंटर तक पहुंचना दुश्वार हो जाएगा। शिक्षकों का कहना है कि मुर्तजानगर का आवासीय विद्यालय बालिकाओं के लिए ठीक नहीं है। पहली बार राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय को यूपी बोर्ड में परीक्षा केंद्र बनाया गया है।
परीक्षा केंद्र निर्धारण में बहुत ही अनियमितता है। कोरोना प्रोटोकॉल का भी ध्यान नहीं रखा गया है। जिस विद्यालय की क्षमता 300 की है, वहां पर 900 बच्चे भेज दिए गए हैं। इसलिए जिन कॉलेजों में सुविधाएं है, उनको सेंटर बनाया जाए। आपत्ति के बाद दोबारा सही तरीके से इसकी जांच कराई जाए। तभी केंद्र बनाया जाए।
- पंकज पांडेय, जिलाध्यक्ष, वित्तविहीन शिक्षक महासभा