रेउसा/रामपुर मथुरा (सीतापुर)। जिले के गांजरी इलाके में नदियों का जलस्तर घटने से कटान तेज हो गया है। शुक्रवार को तटवर्ती इलाके में 30 बीघा खेती योग्य जमीन सरयू नदी में समा गई। हालांकि बाढ़ग्रस्त गांवों में भरा पानी कम होने लगा है लेकिन निचली जगहों पर अभी पानी भरा होने के साथ कीचड़ की वजह से ग्रामीणों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। उधर, बैराजों से पहले की अपेक्षा कम पानी छोड़ा जाना राहत के संकेत दे रहा है। तीनों बैराजों से शुक्रवार को सवा दो लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है।
रेउसा ब्लॉक में बुधवार को सरयू नदी उफनाने से तटीय क्षेत्र के म्योड़ीछोलहा, जटपुरवा, श्रीरामपुरवा तथा भदिम्मरपुरवा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे। इन गांवों के दो सौ से अधिक मकानों के अंदर तक बाढ़ का पानी भर गया था जबकि कई गांव पानी से घिर गए थे लेकिन अगले ही दिन गुरुवार को सरयू का जलस्तर घटने से गांवों, रास्तों व खेतों में भरा पानी भी कम होने लगा था। पानी घटने का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। इससे बाढ़ के तबाही मचाने का खतरा टलने पर ग्रामीणों के साथ प्रशासनिक अमले ने राहत की सांस ली है।
हालांकि बाढ़ग्रस्त इलाके में अभी तक निचली जगहों पर पानी और चारों तरफ कीचड़ होने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। खाना बनाने और शुद्ध पेयजल की किल्लत बनी हुई है। वहीं पानी घटने से कटान तेज हो गई है। तटीय इलाके में शुक्रवार को लगभग 30 बीघा खेती वाली जमीन सरयू निगल गई।
तीनों बैराजों से सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से आगे हालात सुधरने के संकेत मिल रहे हैं। इसके बावजूद बाढ़ पीड़ितों के माथे पर तनाव अभी तक साफ नजर आ रहा है। दूसरी ओर रामपुर मथुरा क्षेत्र अंतर्गत सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है।
जलस्तर घटने से घरों और रास्तों पर भरा पानी लगभग समाप्त हो गया है। शुक्रवार को वाटर लेवल 118.50 मीटर दर्ज किया गया। शुकुलपुरवा ग्राम पंचायत के पांच-छह गांवों को छोड़कर सभी गांवों में भरा पानी समाप्त हो गया है। इससे तटवर्ती कई गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है किंतु घरों व रास्तों पर भीषण कीचड़ के कारण आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बिसवां के एसडीएम सुरेश कुमार ने बताया कि पहले की अपेक्षा बैराजों से काफी कम पानी छोड़े जाने से हालात सुधर गए हैं। अब नदियां अपने दायरे में बह रही हैं। घरों व रास्तों पर भरा पानी घट गया है। बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं हैं फिर भी प्रभावित इलाकों में नावों की व्यवस्था की गई है तथा बाढ़ राहत चौकियों पर पर्याप्त व्यवस्था है। लगातार निगरानी की जा रही है। लेखपालों से भी बराबर रिपोर्ट ली जा रही है।