रामपुर मथुरा (सीतापुर)। महमूदाबाद तहसील प्रशासन ने बाढ़ में बेघर हुए 26 परिवारों के लिए आवासीय भूमि का चिह्नांकन कर दिया है। पट्टा आवंटन के बाद भी भूमि चिह्नित न होने से यह लोग तटबंध पर झोपड़ी और तिरपाल के नीचे गुजर-बसर कर रहे थे।
अमर उजाला में खबर छपने के बाद जिम्मेदारों की नींद टूटी और तीन माह से अटका भूमि चिह्नांकन का काम चार दिन में हो गया। इनमेंं कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिन्हें कई वर्षों से आवासीय भूमि नहीं मिल पा रही थी। आवास के लिए भूमि मिलने से इन परिवारों के चेहरे खिल उठे हैं। हर साल सरयू नदी में उफान से बाढ़ आने पर तटवर्ती गांवों में कई आशियाने कटान की भेंट चढ़ जाते हैं।
बेघर परिवार तटबंध पर अथवा खेतों में तिरपाल तानकर या फिर झोपड़ी बनाकर गुजर-बसर करते हैं। सर्दी के मौसम में तमाम तरह की मुश्किलों से इन्हें जूझना पड़ता है। अमर उजाला ने 16 दिसंबर के अंक में ‘ठिठुरते कट रही 15 परिवारों की रातें’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें बाढ़ में बेघर हुए लोगों की समस्याएं उठाई थीं। खबर छपने के बाद महमूदाबाद तहसीलदार ने तटबंध पर पहुंचकर जायजा लिया।
हालांकि तहसील प्रशासन ने सिर्फ सात परिवारों के तटबंध पर रहने की बात मानी थी। दावा किया था कि सभी परिवारों को पट्टा आवंटित किया जा चुका है। वह अपनी मर्जी से नहीं जा रहे हैं। जबकि बेघर लोगों का कहना था कि पट्टा आवंटन का कागज तो थमा दिया गया लेकिन भूमि का चिह्नांकन नहीं किया गया है।
ऐसे में वह अगर आवास बनाना चाहें तो कहां बनाएं उन्हें जमीन की जानकारी ही नहीं है। राजस्व टीम तीन माह से भूमि का चिह्नांकन ही नहीं कर सकी थी। खबर छपने के चार दिन बाद भूमि चिह्नांकन कर दिया गया।
लेखपाल सतीश कुमार ने बताया बाढ़ में बेघर शिवमंगल, अवधराम, हरि, राकेश, फेरे, सुमन, मनिया, गुचकुन, राजिंदर, मुन्नू, देवरिया, अंगद, सोनू समेत 26 परिवारों के लिए रायसेनपुर के मजरा बबुरी में पट्टों को चिह्नित कर दिया गया है।