सीतापुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का आजीविका सखी के रूप में चयन किया गया है। 235 आजीविका सखियां घरों के समीप ही किचन गार्डन स्थापित करके विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगा रही हैं। इसका लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रयास से 235 आजीविका सखियां ग्रामीणों की सेहत सुधारने का काम कर रही हैं। वह लोगों के घरों के समीप खाली पड़ी जमीनों पर पोषण वाटिका तैयार करा रही हैं। इसमें सब्जियों की पैदावार की जा रही है।
भिनैनी गांव की आजीविका सखी सीता देवी ने प्राकृतिक खेती के लिए किसानों का चयन किया है। इन्हें किचन गार्डन बनाने के लिए प्रेरित कर सब्जी की खेती कराई जा रही है, जिससे किसानों के रसोईघर में हर सीजन में सब्जियां सुलभ रहती हैं। इससे वह आय अर्जित कर रहे हैं।
सरैंया माफी की रेनू ने 15 पोषण वाटिका बनवाई हैं। अपने खेत में जैविक विधि से देसी धान भी लगाया है। कैमहरा कला की आजीविका सखी किरन ने 30 किचन गार्डन संचालित कराए हैं। इसमें भिंडी, लौकी, तोरई आदि सब्जियां पैदा की जा रही हैं।
अंबरपुर गांव की सखी वर्षा ने 20 पोषण वाटिका बनवाई हैं। उप कृषि निदेशक डाॅ. एसके सिंह विभाग से सखियों की हरसंभव मदद कर रहे हैं। आजीविका सखियों का तकनीकी मार्ग दर्शन कृषि विज्ञान केंद्र कटिया के अध्यक्ष डाॅ. दयाशंकर श्रीवास्तव कर रहे हैं। जिला मिशन प्रबंधक अमरजीत सिंह ने बताया कि लक्ष्य के अनुसार आजीविका सखियाें का चयन कर उन्हें बेहतर कार्य करने के लिए निशुल्क प्रशिक्षण और मानदेय दिया जा रहा है।