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पूर्व ब्लॉक प्रमुख सहित तीन को आजीवन कारावास

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जिले के बहुचर्चित विजय शुक्ल हत्याकांड में चौदह साल बाद आया अदालत का फैसला
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सीतापुर। जिले के बहुचर्चित विजय शुक्ल हत्याकांड में न्यायालय ने बुधवार को पूर्व ब्लॉक प्रमुख सहित तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अपर सत्र न्यायाधीश विश्वनाथ द्वारा हत्याकांड के चौदह साल बाद दिए गए इस आदेश में अभियुक्तों पर अर्थदंड भी लगाया गया है।

मालूम हो कि परसेंडी विकासखंड में वर्चस्व की लड़ाई के चलते क्षेत्र पंचायत सदस्य व पूर्व ज्येष्ठ उप ब्लॉक प्रमुख विजय शुक्ल की 20 दिसंबर 2004 की असलहों व बम से हमला कर खैराबाद थानाक्षेत्र के अमरापुर रेलवे क्रॉसिंग के निकट हत्या कर दी गई थी।
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इस केस में कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले मुन्ना सिंह उर्फ उदयराज सिंह उनके पुत्र कुक्कू सिंह, पप्पू सिंह व एक सहयोगी राकेश यादव को मृतक के भाई रमेश चंद्र शुक्ल द्वारा नामजद कराया गया था। आरोपियों की नामजदगी करते हुए वादी ने अपनी प्रथम सूचना रिपोर्ट में इस बात का हवाला दिया कि ब्लॉक प्रमुखी के चुनाव में वर्चस्व को लेकर आरोपीगण विजय शुक्ल से नाराज रहते थे।

इसी के चलते जब घटना वाले दिन विजय अपनी कार से सीतापुर आ रहे थे, तभी अमरापुर रेलवे क्रॉसिंग के बंद होने का फायदा उठाकर आरोपियों ने असलहे व बम से उन पर हमला कर दिया। जिसमें विजय की मौत हो गई जबकि कार में मौजूद उनके नौकर रामप्रसाद को चोटें आई।

इस मामले में पुलिस ने चारों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया। सुनवाई के दौरान मुकदमे के एक आरोपी मुन्ना सिंह की मृत्यु के चलते शेष तीनों के विरुद्ध न्यायालय ने आरोप तय किए। न्यायालय में लंबे चले विचारण के बाद अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 साक्षी अपने कथन के समर्थन में परीक्षित किए गए।

हालांकि बचाव पक्ष ने भी कुछ साक्षी न्यायालय में पेश किए। लेकिन अभियोजन कथानक को सत्य पाते हुए न्यायाधीश ने शिवेन्द्र सिंह उर्फ कुक्कू, अजय प्रताप सिंह उर्फ पप्पू व राकेश यादव को घटना का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

न्यायालय ने तीनों हत्यारों पर 25-25 हजार का अर्थदंड की लगाया है। जिसे जमा न कराए जाने की स्थिति में तीनों को नौ-नौ माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन (वादी) पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी अधिवक्ता आनंद माधव अवस्थी व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता गिरीश यादव द्वारा की गई।

एक अभियुक्त को आयुध अधिनियम में भी सजा
विजय शुक्ल हत्याकांड में दोषी पाए गए राकेश यादव को घटना में प्रयुक्त आलाकत्ल की बरामदगी के आरोप में भी चार वर्ष के सश्रम कारावास व पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा अलग से सुनाई गई। मालूम हो कि राकेश के पास से पुलिस ने विवेचना के दौरान वह असलहा भी बरामद किया था। जो घटना में इस्तेमाल किया गया था।

फैसले के इंतजार में दिखी उत्सुकता
बीते ढाई वर्षों से कभी बहस तो कभी एक अदालत से दूसरी अदालत स्थानांतरित होते रहे विजय शुक्ल हत्याकांड के फैसले को लेकर बुधवार को पूरे दिन कचहरी परिसर में चर्चाओं का माहौल गर्म रहा। हालांकि नवरात्र की अष्टमी के चलते सीतापुर बार एसोसिएशन ने बुधवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने का प्रस्ताव पास कर रखा था।

लेकिन फिर भी कचहरी में इस मामले का फैसला जानने को लेकर न सिर्फ वकीलों बल्कि राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की नजरें टिकी रहीं। कुछ वे चेहरे जो परसेंडी विकासखंड की राजनीति में हस्तक्षेप रखते हैं, न्यायालय परिसर में अलग-अलग स्थानों पर बैठकर मुकदमे का हश्र जानने के लिए उत्सुक दिखे।

जिले की राजनीति का चर्चित चेहरा है कुक्कू सिंह
विजय शुक्ल हत्याकांड के फैसले में दोषी करार दिए गए शिवेन्द्र उर्फ कुक्कू सिंह सीतापुर की राजनीति में एक जाना माना चेहरा हैं। पूर्व में भाजपा के टिकट पर विधान परिषद सदस्य का चुनाव लड़ चुके कुक्कू सिंह के परिवार के पास बीते काफी अर्से से परसेंडी ब्लॉक प्रमुख का पद बरकरार है।

बीच में थोड़े बहुत समय के लिए अगर किसी और के पाले में ब्लॉक प्रमुख का पद गया भी तो अविश्वास प्रस्ताव लाकर उसे पुन: अपने पक्ष में करने में न सिर्फ ये सफल रहे बल्कि अगर पद नहीं भी रहा तो ब्लॉक प्रमुख कोई भी हो दबदबा इसी परिवार का हमेशा कायम रहा।
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तकरीबन तीन माह पूर्व क्षेत्रीय भाजपा सांसद की दिलचस्पी के बावजूद प्रमुख पद पर काबिज अपने विरोधी को एक सत्तापक्ष के विधायक की मदद से हटाने में भी कुक्कू सिंह सफल रहे थे। जिससे पार्टी स्तर पर भाजपा की काफी फजीहत भी हुई थी।
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