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आंखों को मदद की आस, पानी में पानी की तलाश

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आंखों को मदद की आस, पानी में पानी की तलाश
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- जीरो ग्राउंड रिपोर्ट : पीने के स्वच्छ पानी तक को तरस रहे बाढ़ पीड़ित


अनिल विश्वकर्मा/ प्रेम बाजपेई
सीतापुर। घर, रास्ते, खेत व खलिहान सब पानी में समा गए हैं। जिधर देखो उधर घाघरा की बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा है। बावजूद इसके यहां के लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी नसीब नहीं है। लोग बाढ़ के पानी में पीने के स्वच्छ पानी के लिए जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं। हालात ये हैं कि आधा किलोमीटर की दूरी तय कर लोग स्वच्छ पानी अपने घरों को ला रहे हैं।
दुर्गापुरवा गांव के निकट खेतों में माधवराम ने अपना घर बना रखा है। घर के निकट मौजूद हैंडपंप बाढ़ के पानी में समा गया है। इससे माधवराम दुर्गा पुरवा गांव में सरकारी हैंडपंप से पीने के लिए स्वच्छ पानी लेने गया था। लौटा तो बाढ़ का पानी पार करने के लिए उसे बाल्टी को सर पर रखना पड़ा। ऐसा हाल कोई अकेले माधवराम का नहीं है। बल्कि कोनी, जैतहिया, मरेली, सलामत जान पुरवा, सुंदर नगर, श्याम नगर, परमेश्वर पुरवा, रामलाल पुरवा आदि गांवों का है। ये सभी गांव बाढ़ की चपेट में हैं। गांव के संपर्क मार्ग कई स्थानों पर बाढ़ के पानी में समाए हुए हैं। जहां इन गांवों के बाशिंदें पीने के पानी के लिए इस कदर जद्दोजहद कर रहे हैं, वहीं उनकी आंखों में अब भी प्रशासन से मदद की आस है। अगर कोई चौपहिया वाहन उनके गांव के बाहर आकर रुकता है तो गांव के बाशिंदे नाव लेकर उस वाहन की तरफ दौड़ पड़ते हैं। उन्हें यही लगता है कि कोई उन्हें राहत देने के लिए गांव पहुंचा है। लेकिन जब कोई मदद नहीं मिलती, तब वे मायूस होकर लौट जाते हैं।
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खाना बनाने-खाने तक के लिए नहीं बची जमीन : बड़ी उम्मीदों से उन्होंनेे अपने आशियानों को बनाया था। महल न सही, झोपड़ी ही सही। लेकिन ये आशियानें उन्हें महलों की तरह ही सुख देते थे। लेकिन इन दिनों उनके आशियानों पर घाघरा की बाढ़ का ग्रहण लग गया है। जिसकी वजह से वे खुद ही अपने आशियानों को उजाड़कर सुरक्षित ठिकानों के लिए पलायन करने को मजबूर हैं। लेकिन प्रशासन है कि वह आंकड़ों की बाजीगरी में जुटा हुआ है। यह अलग बात है कि प्रशासन का कोई भी कर्मचारी पीड़ितों के गांव तक नहीं पहुंचा। लेकिन कागजों पर उनके आंकड़े दुरुस्त हैं। सोमवार को कोनी गांव के रामलाल व मुन्नीलाल नावों पर घर का सामान रखकर पलायन कर रहे थे। कोनी गांव के बाहर ही बाढ़ के पानी में दोनों परिवारों से मुलाकात हुई, तो दोनों ने बताया कि साहब यहां तो कोई हाल जानने तक नहीं आया। मदद करना तो बहुत दूर की बात है। दोनों ने बताया कि उन्होंने नाव मांगी है, उसी नाव पर गृहस्थी का सामान लेकर गांव छोड़ रहे हैं। अभी यह ठीक नही है, कि अगला ठिकाना कहां बनेगा। गांव में जाकर देखा तो रामलाल के घर से दस कदम की दूरी पर घाघरा नदी का पानी बह रहा था, जबकि घरों में बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा था। फूस के छप्पर को गांव के लोग उठाकर नाव पर रख रहे थे। इसी गांव के कमलेश, साधू, किशोरी, मुरली, श्रीकेशन भी परेशान थे। गांव में आगे बढ़े तो देखने को मिला कि छप्पर के नीचे नाव लगी हुई थी। इसी नाव पर लल्लू की पत्नी सुखरानी चूल्हा जलाकर खाना बना रही थी। चंद कदम बाढ़ के पानी में आगे बढ़ने पर देखा कि एक ही नाव पर गांव के पांच बाढ़ पीड़ित खाना खा रहे थे। हाथों में रोटियां थी, तो थाली में चटनी और चावल था। ज्यों ही उन पीड़ितों ने देखा, बोले साहब आओ, आप भी खाओ। पूछने पर उन पीड़ितों ने नाम तो नहीं बताया, लेकिन इतना जरूर कहा, कि साहब यहां तो कोई देखने भी नहीं आया। हालत यह है कि बाढ़ की वजह से इतनी जमीन भी सूखी नहीं बची है, जहां बैठकर वे भोजन कर सकें। नतीजा वे नाव पर ही भोजन करने को मजबूर हैं। कुछ ऐसा ही हाल जैतहिया, परमेश्वर पुरवा, मरेली, श्याम नगर सुंदर नगर आदि गांवों का था। जहां के बाशिंदे तेजी से पलायन कर रहे हैं और सुरक्षित ठिकानों को जा रहे हैं।

खुले आसमान के नीचे सड़क पर आया ‘स्कूल’ : मंगलवार को श्याम नगर के निकट सड़क पर स्कूली ड्रेस पहने करीब 50 बच्चे पढ़ाई करने में मशगूल थे। उन्हें शिक्षक श्रीकांत दीक्षित कविता पाठ करा रहे थे। जबकि हरिओम, सुंदरी देवी व इरफान बच्चों की कापिंयों को चेक कर रहे थे। उन्हें देखकर पूछा की माजरा क्या है, इस पर श्रीकांत दीक्षित ने बताया कि ये सारे बच्चे जैतहिया प्राथमिक विद्यालय के हैं। यह स्कूल बाढ़ की चपेट में आ गया है। स्कूल में बच्चों के डूबने भर का पानी भरा हुआ है। स्कूल में करीब 240 बच्चों का एडमिशन है। बाढ़ से 50 बच्चे ही स्कूल आ पाए हैं। इस वजह से स्कूल से एक किलोमीटर दूरी पर सड़क पर ही क्लास लगाई गई है। रेउसा क्षेत्र में चहलारी, जैतहिया प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक, रामलाल पुरवा प्राथमिक विद्यालय, फौजदार पुरवा प्राथमिक विद्यालय आदि कई सरकारी स्कूल इन दिनों बाढ़ की चपेट में हैं।

110 गांव बाढ़ की चपेट में, बढ़ता जा रहा घाघरा का जलस्तर : जिले के गांजरी इलाके में बाढ़ विकराल रूप लेती जा रही है। कल तक जो 105 गांव बाढ़ की चपेट में थे, उनकी संख्या बढ़कर 110 के करीब हो गई है। हजारों बीघा खेती जलमग्न हो गई है। रेउसा से चहलारी की तरफ बढ़ते ही तीन किलोमीटर की दूरी पार करते ही घाघरा की बाढ़ नजर आने लगती है। घाघरा तट से दस किलोमीटर रेउसा की तरफ बाढ़ का पानी पहुंच गया है। यह पानी उस क्षेत्र के नाले में गिर रहा है। अभी तक इस क्षेत्र में कहीं भी बाढ़ चौकी नजर नहीं आ रही है। मंगलवार को श्याम नगर व सुंदर नगर में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। इसी तरह से चहलारी स्कूल में भी बाढ़ का पानी भर गया है।

श्याम नगर से जैतहिया जाने वाले मार्ग पर जैतहिया गांव के निकट पानी बह रहा है। मरेली गांव भी बाढ़ की चपेट में है। सबसे बुरी हालत जैतहिया प्राथमिक विद्यालय की है, जहां बच्चों के डूबने भर का पानी हिलोरे मार रहा है। गांव में मौजूद सड़क बह गई है। रामलाल पुरवा गांव में तो बाढ़ का पानी हिलोरे मार ही रहा है, वहीं गांव में लगा टावर भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गया। लोध पुरवा गांव में भी बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा है। सबसे दयनीय हालत कोनी गांव की है, जहां पर कमर के बराबर पानी गांव के मुख्य मार्ग पर व घरों में घुटनों तक पानी भरा हुआ है। ये ऐसे गांव हैं, जहां ग्रामीणों की शिकायत थी, कि कोई भी सरकारी कर्मचारी हाल जानने तक नहीं पहुंचा।

गांव के बाशिंदे या तो किराए की नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं और या फिर मांग कर नाव ला रहे हैं। खाना पीना सब कुछ नावों पर ही हो रही है। पचीसा टापू के बाशिंदे भी परेशान नजर आ रहे हैं। उस टापू पर उनके पालतू जानवर फंसे हुए हैं। जिस रफ्तार से बाढ़ का पानी बढ़ रहा है, उसे देखकर लग रहा है कि बहुत जल्द ही बाढ़ का पानी मारू बेहड़ चौराहे पर दस्तक देगा। चहलारी घाट के निकट मौजूद त्यागी बाबा आश्रम की जमीन पर भी बाढ़ का पानी बढ़ता जा रहा है। बाढ़ पीड़ित चहलारी मार्ग व अन्य संपर्क मार्गों पर नया आशियाना बना रहे हैं। वहीं मंगलवार को शारदा व घाघरा बैराजों से 232108 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे बाढ़ के पानी में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।
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प्रशासन की नजर में 26 मजरे ही प्रभावित
प्रशासन के पास जो आंकड़े हैं उनमें 22 मजरे रेउसा क्षेत्र के बाढ़ की चपेट में है जबकि 4 मजरे महमूदाबाद इलाके में बाढ़ की चपेट में हैं। एडीएम विनय पाठक के मुताबिक पानी घट-बढ़ रहा है, इस वजह से बाढ़ की चपेट में आने वाले गांवों की संख्या भी घट बढ़ सकती है।
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