लहरपुर (सीतापुर)। इलाके से होकर गुजरने वाली लहरपुर माइनर किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। पिछले एक पखवाड़े में एक ही जगह से तीन बार नहर पटरी कटने से किसानों की 500 बीघा धान की फसल डूब चुकी है। रविवार को एक बार फिर पानी के तेज दबाव से पटरी कट गई और खेतों में पानी भरने से 100 बीघा धान की फसल डूब गई। जलमग्न फसलों के सड़ने का खतरा पैदा हो गया है। सूचना के बाद भी नहर विभाग ने मौके पर पहुंचना तक मुनासिब नहीं समझा है।
मालूम हो, कि जुलाई माह में मोहद्दीनपुर पुलिया के पास लहरपुर माइनर की पटरी तीन बार कट चुकी है। जिसमें करीब 500 बीघा धान की फसल डूबने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। पहली बार 23 जुलाई को नहर पटरी कटने से 100 बीघा फसल डूबी। क्षतिग्रस्त पटरी को अगले दिन यानी 24 जुलाई तक दुरुस्त न करवाए जाने से 200 बीघा धान की फसल डूब गई थी।
26 जुलाई को उसी जगह पटरी कटने से 200 बीघा धान की फसल डूब गई थी। 3 अगस्त को पटरी कटने पर ग्रामीणों ने खुद दुरुस्त किया। लेकिन पानी के दबाव से रविवार 5 अगस्त को एक बार फिर उसी जगह से पटरी कट गई। करुणाशंकर की 3 बीघा धान की फसल नहर की मिट्टी से पट गयी है। जबकि दूसरे किसानों की लगभग 100 बीघा फसल डूब गई है।
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कसान तुलसीराम, हरीश कुमार व दिनेश कुमार ने बताया सफाई नहीं कराए जाने से नहर में काफी सिल्ट व झाड़-झंखाड़ जमा हो गई है। किसान अंबु, रामखेलावन, शखरुद्दीन तथा जाकिर अली ने बताया कि नहर विभाग के अवर अभियंता नारायण सिंह को पटरी कटने की सूचना दी गई, लेकिन शाम तक कोई नही पहुंचा था। किसानों ने बार-बार पटरी कटने से होने वाले फसल के नुकसान का मुआवजा दिए जाने की मांग उठाई है।
अवर अभियंता नहर विभाग नारायण सिंह ने कहा कि नहर पटरी कटने की सूचना मिली है। जल्द ही क्षतिग्रस्त पटरी की मरम्मत करवाई जाएगी। नहर की सफाई के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। बजट आते ही सफाई कराई जाएगी।