एक साथ उठेंगी, मां-बेटी, बहू व नाती की अर्थी
सीतापुर। ...भगवान ये तूने क्या किया। अब मुझे कौन संभालेगा। वह तो अपनी मां के अंतिम दर्शन को जा रही थी लेकिन ऐसी अनहोनी हुई कि अब घर से एक साथ चार अर्थियां उठेंगी।
यह बोझ अब सहा नहीं जाएगा। हादसे के बाद बदहवास हुए संजय बार-बार यही दोहरा कर बेहोश हुआ जा रहा था। रामकोट के हेमपुर नेरी के पास हुई दुर्घटना में अपनी पत्नी ऊषा, बच्चे शिवम व सरहज की मौत हो गई।
वहीं घटना से कुछ देर पहले ही सास की मौत का गम भी उसे साल रहा था। ट्रक व टैम्पो की टक्कर में संजय के परिवार के साथ कई अन्य परिवारों की खुशियां भी तबाह हो गईं।
बताते हैं कि शहर के मिर्दही टोला निवासी बिटोली देवी की बीमारी के चलते शनिवार भोर मौत हो गई। अंत्येष्टि शनिवार को ही की जानी थी।
ऊषा अपने बच्चे शिवम व सरहज के साथ मां की अंत्येष्टि में शामिल होने निकली थी लेकिन हादसे का शिकार हो गई। जिसकी वजह से बिटोली की अंत्येष्टि का कार्यक्रम रोक दिया गया।
अब परिवार के सदस्य बिटोली देवी के साथ ही उसकी पुत्री ऊषा देवी, नाती शिवम व बहू रिंकी देवी की भी अंत्येष्टि करेंगे।
हाईवे से पोस्टमार्टम तक कोहराम
हादसा नेरी के निकट हुआ, जिसके बाद शवों को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया। इस हादसे की खबर पाने के बाद मृतकों के परिवारीजन दौड़कर घटनास्थल पर पहुंच रहे थे।
जिसके बाद वे पोस्टमार्टम हाउस जा रहे थे। हालत यह थी कि घटनास्थल से पोस्टमार्टम हाउस तक हायतौबा मची हुई थी। हर कोई अपने परिवार के सदस्य को खो देने के गम में रो रहा था।
आधा घंटे तक होता रहा क्रेन का इंतजार
नेरी के निकट ट्रक ने टैम्पो को रौंद दिया था। निकट गांव के लोग मदद के लिए दौड़कर मौके पर पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचकर लोग बेबस हो गए।
वजह थी कि पूरा टैम्पो व उसमें सवार लोग ट्रक के नीचे दबे हुए थे। ऐसे में बगैर ट्रक को हटाए मदद नहीं पहुंचाई जा सकती थी।
क्रेन के बिना ट्रक को हटाना संभव नहीं था। करीब आधा घंटे के इंतजार के बाद क्रेन पहुंची, तब कहीं जाकर बचाव कार्य शुरू हो सका।