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जीएसटी से उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

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जीएसटी से उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत
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कलेक्ट्रेट सभागार में जीएसटी संबंधी बैठक
सीतापुर। परिवहन विभाग की प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जीएसटी संबंधी बैठक में कहा कि सरकार की मंशा है कि जीएसटी सभी जगह सफलता के साथ लागू हो। कहा कि देश एवं प्रदेश के 18 करों को समाप्त कर जीएसटी के रूप में एक कर लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों का जीएसटी में 75 प्रतिशत पंजीकरण हो चुका है। 31 जुलाई तक शत प्रतिशत व्यापारियों का पंजीकरण हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने से वस्तुओं के मूल्य में कमी से उपभाक्ताओं को राहत मिलेगी। दैनिक उपभोग की वस्तुएं जैसे दूध, दही, खाद्यान, दालें, नमक, आटा को जीएसटी में कर मुक्त रखा गया है। उन्होंने बताया कि सामान्य जन के उपभोग की वस्तुएं जैसे कपड़ा, 500 रूपये तक के फुटवियर, 1000 रूपये मूल्य तक के रेडीमेड गारमेंट, मसाले, एलपीजी, आदि पर जीएसटी की न्यूनतम दर 5 प्रतिशत रखी गई है। उन्होंने कहा कि विलासिता की वस्तुएं जैसे कॉस्मेटिक्स, मार्बल, टाइल्स, मंहगी कार, सिगरेट पर उच्चतम दर 28 प्रतिशत रखी गई है। वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले कर की पूरे भारत में एक समान दर रखी गयी हैं।
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उन्होंने कहा कि अन्तर प्रान्तीय जांच चौकियां समाप्त होने से पूरे भारत में माल का निर्बाध परिवहन होगा तथा जीएसटी में समस्त कार्य ऑनलाइन होने से उद्यमियों और व्यापारियों को विभिन्न विभागों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि 20 लाख से 75 लाख के सालाना टर्नओवर के व्यापारियों के लिये समाधान योजना लागू की ग है। यह योजना अपनाने वाले व्यापारियों को न्यूनतम दर पर समाधान राशि जमा कराने की सुविधा इस योजना से मंझोले व्यापारियों को अधिक हिसाब-किताब रखने की झंझट से मुक्ति मिलेगी तथा रुपये 75 लाख से कम वार्षिक टर्नओवर वाले व्यापारियों को एक सरल प्रारूप जीएसटी-4 में तिमाही नक्शा दाखिल करने की सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि जीएसटी के तहत पंजीयन प्राप्त करने की सुगम व्यवस्था की गयी है तथा पंजीयन का आवेदन केवल ऑनलाइन होगा। आवेदन के तीन के अन्दर घर बैठक पंजीयन प्राप्त करने की सुविधा दी गयी है। उन्होंने इस अवसर पर व्यापारियों की समस्याओं के बारे में भी पूछा तथा उनकी समस्याओं के निराकरण के बारे में उपाय भी बताया। बैठक में जिलाधिकारी डॉ. सारिका मोहन ने बताया कि पूरे देश में एक समान कर प्रणाली और एक समान दर होने से सभी राज्यों में निवेश का समान अवसर मिलेगा। कहा कि वार्षिक कर निर्धारण की व्यवस्था समाप्त कर दी गयी है तथा व्यापारियों द्वारा दाखिल रूप पत्र ही स्वत: कर निर्धारण आदेश होगा। उन्होंने कहा कि कुल पंजीकृत व्यापारियों में से केवल 5 प्रतिशत व्यापारियों का वार्षिक ऑडिट हेतु चयन किया जायेगा तथा निर्यातकों को निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की खरीद पर अदा किये गये कर (आईटीसी) की वापसी की सुविधा होगी।
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