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200 बैंकों का खजाना खाली, नहीं हुआ भुगतान

Wed, 21 Dec 2016 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के बाद बैंकों में 500 व 1000 के नोट जमा करने को महज 9 दिन का समय ही बचा है। 41 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक बैंकों की हालत नहीं सुधर सकी है। बुधवार को भी बैंक कैश के संकट से जूझते दिखे। लोग कैश पाने की उम्मीद लेकर बैंकों तक पहुंचे जरूर, लेकिन बहुत लोगों को भुगतान नहीं मिल सका।
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अधिकांश बैंकों में कैश मौजूद नहीं था, जिन बैंकों में कैश था, वे बेहद कम रकम भुगतान कर रही थीं। यहां की 325 में से 200 बैंकों में कैश नहीं था। खजाने खाली थे। महज 125 बैंकों में कैश था। वे बेहद कम रकम भुगतान कर रही थीं। बैंक अधिकारियों का कहना था कि आरबीआई से कैश न आने की वजह से परेशानी हो रही है।

बुधवार सुबह होते ही लोग अपने घरों से निकलकर एटीएम व बैंकों की तरफ चल दिए और बैंक व एटीएम के सामने पहुंचते ही लाइन लगाकर खड़े हो गए। बैंकों में ग्राहकों की भीड़ इस कदर उमड़ी कि लंबी-लंबी कतारें लग गईं। जिला मुख्यालय पर इलाहाबाद बैंक, स्टेट बैंक में दस हजार रुपये अधिकतम राशि का भुगतान किया गया।
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कुछ बैंक ऐसे थे जिनमें 5 हजार रुपये तक ही भुगतान किया जाता रहा। उधर, जिला मुख्यालय पर महज एक ही एटीएम चलता मिला। जबकि ग्रामीण क्षेत्र की बैंकों का बुरा हाल था। लहरपुर कस्बे की इलाहाबाद व इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की शाखाओं में कैश नहीं था।

लोग इन बैंकों के सामने सुबह से ही लाइन लगाकर खड़े हो गए थे, लेकिन कैश न होने का रोना रोते हुए भुगतान करने से इन्कार कर दिया। जिसके बाद बैंक पहुंचे लोग बगैर कैश निकाले ही घरों को लौट गए। इनमें कुछ ऐसे भी थे, जो पिछले चार दिनों से दौड़ लगा रहे थे।

कुछ बैंक शाखाओं में कैश था, लेकिन अधिकतम 2 हजार रुपये तक ही भुगतान किया जाता रहा। कुछ ऐसा ही हाल तंबौर व रेउसा कस्बे का रहा। बिसवां, महमूदाबाद, सिधौली, मछरेहटा, परसदा, महोली, पिसावां, हरगांव, अटरिया आदि कस्बों में मौजूद बैंकों में भी कैश का संकट छाया रहा।
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