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चुनावी महासंग्राम से गायब निर्दल व छोटे दलों के प्रत्याशी

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नामांकन के बाद से लोगों को दर्शन हुए दुर्लभ
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सीतापुर। शहर के चौराहों से गांव के चौबारों तक हर ओर चुनाव की धूम मची है। मतदान की तिथि करीब आ रही है। उम्मीदवार अपने प्रचार अभियान को रफ्तार देते जा रहे हैं। सभा, नुक्कड़ नाटक, दावतों के जरिए वोटर रिझाने की कवायदें चल रही हैं मगर इस चुनावी सीन से निर्दलीय एवं छोटी पार्टियों के प्रत्याशी नदारद हैं।

कहने को वह चुनावी समर के योद्धा हैं, पर वोटरों को इनके दर्शन दुर्लभ हैं। बरसाती मेढ़कों की तर्ज पर नामांकन के वक्त ये दिखे, फिर गुम हो गए। हां, कागजातों में इनका नाम चुनावी रण के सूरमाओं में जरूर दर्ज हैं। सीतापुर व मिश्रिख के अलावा जिले की सीमा से धौरहरा एंव मोहनलालगंज संसदीय सीटें भी ताल्लुक रखती हैं।
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इन सीटों पर तकरीबन दो दर्जन छोटी पार्टियों के टिकट से भी प्रत्याशी महासमर में कूदे हैं। निर्दल व अधिकांश छोटे दलों के उम्मीदवार कहने को तो चुनावी संग्राम के रणबांकुरे हैं, पर मैदान में इनकी सूरत देखने को नहीं मिल रही है। बस परचा भरकर गुम हो गए।

सीतापुर लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां से 12 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें से तुराब अली, प्यारे लाल, विनोद कुमार, सुचिता कुमार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी रण में कूदे हैं। मोहनलालगंज से जगदीश, प्रतिभावती, रमेश कुमार तथा धौरहरा से रीतू वर्मा निर्दलीय प्रत्याशी हैं।

इसके अलावा यहां की सीटों पर आमजन पार्टी, बहुजन आवाम पार्टी, आवामी समता पार्टी लोक दल, समदर्शी, मानवतावादी, आदर्श संग्राम पार्टी, हिंदुस्तान निर्माण दल, शिव सेना सरीखे दो दर्जन छोटे दलों से प्रत्याशी मैदान में उतरे हैं।
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इन सीटों पर छह मई को वोट डाले जाएंगे। मतदान की तारीख करीब आती जा रही है। इसके मद्देनजर उम्मीदवार धुआंधार प्रचार में जुटे हैं। सभाएं, नुक्कड़ नाटक, दावतों का सिलसिला जारी है। घर-घर दस्तक देकर वोटर रिझाए जा रहे हैं मगर इस चुनावी संग्राम में निर्दल व कई छोटे दलों के प्रत्याशी ढूंढे नहीं मिल रहे हैं।
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