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सरयू में उफान से 19 गांवों में भरा पानी

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रेउसा के मेवड़ी छोलहा गांव में घुसा पानी। - फोटो : SITAPUR
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रेउसा/रामपुर मथुरा (सीतापुर)। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और बैराजों से छोड़े जाने वाले लाखों क्यूसेक पानी के कारण सरयू व शारदा नदी उफान पर हैं। बुधवार को सरयू के तटवर्ती 19 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। करीब पांच हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। जटपुरवा के चार घर कटान के मुहाने पर पहुंच गए हैं। हजारों बीघा खेत पानी से लबालब हो गए हैं। कई गांवों के संपर्क मार्ग डूबने से आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। बुधवार को बैराजों से फिर लगभग तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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इससे नदी का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। बाढ़ आने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है। गृहस्थी बटोरकर लोग छतों, तख्तों व चारपाई पर एकत्र कर रहे हैं। बढ़ता जलस्तर अब खतरे के निशान से महज दस सेमी दूर है। बीते तीन दिनों से रेउसा व रामपुर मथुरा क्षेत्र में होकर बहने वाली सरयू नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही थी। उफनाई सरयू की बेकाबू लहरें बुधवार को रेउसा इलाके के म्योड़ीछोलहा, जटपुरवा, श्रीरामपुरवा तथा भदिम्मरपुरवा गांवों के अंदर घुस गई। इन गांवों के लगभग चार सौ घर बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। घरों में पानी भरने से ग्रामीण अपनी गृहस्थी समेटकर छतों, तख्त व चारपाई पर एकत्र करने लगे हैं। जटपुरवा के मोबीन, इलियास, मुख्तार आदि के मकान कटान की कगार पहुंच गए हैं।
कई गांवों के संपर्क मार्गों पर लहरें हिलोरे मार रही हैं। हजारों बीघा फसल पानी में डूब गई है। आवागमन के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। रामपुर मथुरा क्षेत्र के शुकुलपुरवा, सुंदरपुरवा, महाजनपुरवा, रामरूपपुरवा, नागेसरपुरवा, टपरा, कुन्नापुरवा, लोधनपुरवा, छोटेपुरवा अंगरौरा समेत 15 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। घरों में दो फीट तक पानी भर गया है। इन गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भरने से आवागमन ठप हो गया है। ग्रामीण नाव का सहारा लेकर बाहर निकल रहे हैं। बुधवार को सरयू का पानी 118.90 मीटर रहा। खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर नीचे जलस्तर रहने पर भी तटीय क्षेत्र के गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
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बाढ़ के पानी से घिरे 35 गांव
रेउसा क्षेत्र के भानीपुर, चकपुरवा, नगीनापुरवा, फौजदारपुरवा, दुर्गापुरवा, समयदीनपुरवा, जैतहिया, मरेली समेत लगभग 35 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इन गांवों के चारों तरफ खेतों और रास्तों पर पानी भर गया है। किसी भी समय बाढ़ का पानी आबादी के भीतर घुस सकता है। इससे ग्रामीण दहशत में हैं। वहीं, रामपुर मथुरा इलाके में बाढ़ आने के बाद मवेशियों के चारे का संकट गहराने लगा है। चारे का इंतजाम करने की सभी व्यवस्थाएं बाढ़ की भेंट चढ़ गई हैं। ग्रामीण खुद की जान व गृहस्थी सुरक्षित करने के साथ मवेशियों के लिए भी फिक्रमंद हैं।
प्रभावित क्षेत्र में चल रही नावें : तहसीलदार
बिसवां तहसीलदार राजकुमार गुप्ता ने बुधवार को बाढ़ग़्रस्त इलाके का दौरा किया। श्रीरामपुरवा में ग्रामीणों से कोटेदार की शिकायत मिलने पर फटकार लगाते हुए कार्यशैली में सुधारने के निर्देश दिए। बाढ़ प्रभावित गांवों के प्रधानों से पंचायत भवन व सामुदायिक शौचालय के लिए भूमि चिह्नित करने को कहा। उन्होंने बताया प्रभावित इलाके में नावें उपलब्ध करा दी गई हैं। ग्रामीणों से वार्ता करते हुए किसी भी तरह की समस्या होने पर तत्काल सूचित करने को कहा है। तहसीलदार ने बताया कि लेखपालों को चौबीस घंटे सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों को किसी भी तरह की समस्या नहीं होने दी जाएगी।
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