सीतापुर। राजस्व के जनक राजा टोडरमल की जयंती पर रविवार को राजा टोडरमल स्मारक समिति के पदाधिकारियों ने उनकी प्रतिमा पर फूल माला चढ़ाकर उन्हें याद किया। इसके बाद वक्ताओं ने उनके कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए टोडरमल को भू पैमाइश का जनक बताया।
शहर के राजा टोडरमल पार्क में स्थापित उनकी प्रतिमा पर समिति के पदाधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। बाद में आयोजित गोष्ठी में चार्टर्ड अकाउंटेंट हरीश शाह ने राजा टोडरमल के निर्मित राजस्व एवं अन्य जनहित के कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि कि राजा टोडरमल ने राजस्व की ऐसी प्रणाली को जन्म दिया, जिससे आज बिस्वा भर जमीन को भी नाप-जोख व मूल्यांकन कर क्रय-विक्रय व लिपिबद्ध किया जा सकता है।
आधुनिक समाज भी महाराज राजा टोडरमल का ऋणी है। राजा टोडरमल स्मारक समिति के संस्थापक संजय पुरी ने कहा कि आज राजा टोडरमल की जयंती है। पर दुर्भाग्य की बात यह है कि राजस्व विभाग से जुड़े जो लोग राजस्व से ही अपनी जीविकोपार्जन करते हैं व जनता का कार्य करते है, वे न तो अधिकारिक रूप से जयंती मनाते हैं और न जयंती में सहयोग करते हैं। जबकि सभी विभाग व समाज अपने जनक अपने निर्माता की जयंती में हिस्सेदारी करते हैं और अपने पूर्वज के प्रति सम्मान प्रकट कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हैं।
पर उनकी उदासीनता का उदाहरण देखिए कि एक भी अधिकारी राजा टोडरमल की मूर्ति पर माल्यार्पण करने तक नहीं आया। जबकि उन सबके लिए बड़े गर्व का विषय होना चाहिए कि पूरे देश में चल रही राजस्व प्रणाली के जनक का जन्म सीतापुर में ही हुआ और पूरे भारत में राजा टोडरमल की बनाई नीति व प्रणाली सर्वमान्य है।
गोष्ठी में समाजसेवी आकाश बजरंगी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शिवनारायण शर्मा, पूर्व एमएलसी भरत त्रिपाठी, दिनेश जायसवाल, अनिल मल्होत्रा आदि ने अपने विचार रखे।
उधर, राजा टोडरमल की जयंती लहरपुर क्षेत्र के राजापुर गांव व नगर पालिका परिषद प्रांगण एवं तहसील प्रांगण में धूमधाम से मनाई गई। समिति के अध्यक्ष संजय पुरी ने राजापुर गांव में राजा टोडरमल द्वारा निर्मित मंदिर व तीर्थ पर विशेष पूजा-अर्चना कर राजा टोडरमल को भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन हिंदी साहित्य परिषद लहरपुर के अध्यक्ष संतोष कश्यप ने किया।