बैराजों से फिर छोड़ा गया सवा दो लाख क्यूसेक पानी, तटीय इलाकों के सहमे बाशिंदे
रेउसा (सीतापुर)। पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर जिले के गांजरी क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। यहां से होकर गुजरने वाली शारदा व घाघरा नदियां उफना रही हैं। रेउसा क्षेत्र में करीब आठ गांवों के संपर्क मार्ग बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, करीब 20 गांव बाढ़ के मुहाने पर खड़े है।
10 गांवों के बेहद करीब बाढ़ का पानी पहुंच गया है। जहां नदी का यह रूप है, वहीं बारिश ने और मुसीबत बढ़ा दी है। दूसरी तरफ शारदा व बनबसा बैराजों से सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे जलस्तर में और इजाफा होने की संभावना नजर आ रही है। कुल मिलाकर मुसीबत कम होती नहीं दिख रही है।
इन दिनों रेउसा क्षेत्र के कोनी, दुर्गा पुरवा, फौजदार पुरवा, लोध पुरवा, मरेली, जैतहिया समेत करीब 20 गांव बाढ़ के मुहाने पर हैं। कोनी व मरेली ऐसे गांव हैं, जो बाढ़ के पानी से बुरी तरह से घिर गए हैं। खेतों से निकलकर पानी अब आबादी की तरफ बढ़ रहा है।
संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी के चपेट में आ गए हैं। इसी तरह से पूरे क्षेत्र में करीब आठ संपर्क मार्ग बाढ़ की चपेट में हैं। लोध पुरवा समेत करीब 10 की संख्या में ऐसे गांव हैं, नदी की बाढ़ का पानी जिनसे चंद कदमों की दूरी पर हिलोरे मार रहा है।
तटीय क्षेत्र के करीब 3 हजार बीघा खेत बाढ़ के पानी में समाए हुए हैं। एक ओर जहां बाढ़ का पानी मुसीबत बना हुआ है, वहीं सोमवार की रात से शुरू हुई बारिश ने तटीय क्षेत्र के बाशिंदों को परेशान कर दिया है। बरसाती नाले पहले से ही उफनाए चल रहे हैं, वहीं बारिश ने बाढ़ के पानी में इजाफा किया है।
प्रशासन की नजर में दस गांव प्रभावित
तटीय क्षेत्र में जहां 20 गांवों के करीब बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा है। वहीं प्रशासन दस गांवों को ही प्रभावित मान रहा है। मंगलवार को एडीएम विनय पाठक ने बताया कि हालात अभी सामान्य है। करीब 10 गांव प्रभावित हैं। जिनमें तीन ऐसे गांव हैं, जहां नदी बेहद करीब है और वहां पर नुकसान हुआ है।