जिले के गांजरी क्षेत्र में शनिवार रात बाढ़ ने दस्तक दे दी। घाघरा नदी उफान पर है। क्षेत्र के करीब 18 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। तटीय क्षेत्र के खेत-खलिहान व रास्ते जलमग्न हो गए हैं।
रातों-रात आई बाढ़ से सैकड़ों परिवार बाढ़ के पानी में फंस गए हैं। जिनके मकान पक्के हैं, उन्होंने परिवार समेत छतों पर शरण ले रखी है। प्रशासन की ओर से अभी तक प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू नहीं हो सके हैं।
उधर, रविवार को विभिन्न बैराजों से तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया। यह पानी तटीय क्षेत्रों में तबाही मचा सकता है। रविवार सुबह क्षेत्र के लोगों की नींद खुली तो गांव में घाघरा नदी का पानी देख लोग सहम गए।
तटीय क्षेत्र के 18 गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका था। खेत व रास्ते जलमग्न हो गए थे। गांवों की करीब एक हजार आबादी बाढ़ के पानी में फंस गई है। निर्मल पुरवा के संतोष कुमार, पेशकार, भाई लाल आदि ने बताया कि बाढ़ आ गई, लेकिन उससे पहले प्रशासन ने बाढ़ की चेतावनी जारी नहीं की थी।
तमाम परिवारों ने अपने मकानों पर डेरा डाल रखा है। कुछ परिवारों ने छप्परों पर जैसे-तैसे शरण ले रखी है। रविवार को तीनों बैराजों से 323435 क्यूसेक पानी सीतापुर की तरफ छोड़ा गया है, हालांकि इस पानी को यहां आने में 24 घंटे का वक्त लगेगा। यह पानी जब रेउसा क्षेत्र से गुजरेगा, तो बाढ़ का पानी कई और गांवों को चपेट में ले लेगा।
बाढ़ की आशंका को देखते हुए कई परिवार घर छोड़ पलायन को मजबूर हैं। सबसे बुरा हाल पचीसा गांव का है। टापू बनने के बाद गांव अब बाढ़ की चपेट में आता जा रहा है।
रामपुर मथुरा क्षेत्र में घाघरा नदी पूरी तरह से उफान पर है, यहां भी शुकुल पुरवा, अंगरौरा, कनरखी आदि गांवों की तरफ बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ता जा रहा है।