सीतापुर। शहर का सरोजनी वाटिका पार्क बदहाली का शिकार हो गया है। इस पार्क में लगे संसाधन जर्जर हो चुके हैं। बेंचें टूटी पड़ी हैं। फव्वारा बंद हो गए है। ट्री लाइटों के बल्ब गायब हैं। इसकी वजह से पार्क आने वाले लोगों को एक भी सुविधा नहीं मिल पा रही है। नगर पालिका की उपेक्षा के चलते दिन प्रतिदिन पार्क की सूरत बदरंग होती ही जा रही है, फिर भी इसकी अनदेखी की जा रही है।
शहर में आंख अस्पताल के निकट सरोजनी वाटिका पार्क बना हुआ है। इस पार्क में सुबह-शाम वीआईपी से लेकर आम लोग तक टहलने आते हैं। करीब आठ वर्ष पहले पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष आशीष मिश्र ने इस पार्क की सूरत बदली थी। यहां नए तरीके से फव्वारा, झूले व बेंचें लगाई गई थीं। साथ ही पेयजल व्यवस्था भी सही कराई गई थी। इससे यहां पर आने वाली की काफी तादाद बढ़ गई थी।
लोगों को सुविधाएं भी मिलने लगी थीं। लेकिन इसके बाद नगर पालिका इनको संरक्षित करना भूल गया है। इस लापरवाही की वजह से मौजूदा हालात बदहाली बयां कर रहे है। बेंचें टूटी पड़ी हैं। फव्वारा में न तो लाइटें जल रही हैं और न ही पानी भरा है। इसमें गंदगी का ढेर लगा हुआ है। इसी प्रकार झूले टूट चुके है। इसमें जंक लग गई है।
इससे बच्चे अब झूले का आनंद नहीं ले पा रहे हैं। पेयजल की व्यवस्था भी ठप है। वाटर कूलर बंद पड़ा है। बैठने के लिए बने गोलनुमा स्थान से टिनशेड उड़ चुकी है। इससे यहां पर बहुत से लोगों ने आना जाना छोड़ दिया है। जबकि शहर का यह एक मात्र बड़ा पार्क है। प्रशासक/सिटी मजिस्ट्रेट प्रेम प्रकाश उपाध्याय का कहना है कि पार्क की अव्यवस्थाएं दूर की जाएंगी।
कागजों में सिमटा पार्क
केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत पार्क का चयन किया गया था। इससे लोगों को उम्मीद थी कि पार्क की सूरत में चार चांद लगेंगे। इसको लेकर शुरुआत में नगर पालिका ने खूब तेजी भी दिखाई। पार्क की डीपीआर बनाकर शासन को भेजी गई। यह संभावना बढ़ गई थी कि जल्द ही नए लुक में पार्क नजर आएगा। लेकिन यह सब कागजों में ही सिमटकर रह गया। धरातल पर एक भी काम उतर नहीं पाया। बाशिंदों का कहना है कि नगर पालिका शहरवासियों को कोई सुविधा नहीं दे पा रहा है।
वीआईपी है आसपास का क्षेत्र
यह पार्क शहर के बीचोबीच में पड़ता है। इस पार्क के आसपास का पूरा इलाका वीआईपी क्षेत्र है। जहां पर डीएम से लेकर एसपी व अन्य अफसरों के आवास बने हुए हैं। यह लोग सुबह मार्निंग पार्क यही पर करने आते है। साथ ही आसपास कई स्कूल कॉलेज व कोचिंग हैं। इससे यहां पर सुबह से लेकर शाम तक खूब रौनक रहती है। लेकिन सुविधाओं के अभाव में अब यह फीकी पड़ गई है।