सिधौली (सीतापुर)। कृषि विज्ञान केन्द्र अम्बरपुर के शेडनेट में उगाई जाने वाली शिमला मिर्च को बड़े शहरों के मॉल व फाइव स्टार होटलों में भेजने की कवायद शुरू कर दी गई है। यहां हरी, लाल, पीली के अलावा नारंगी तथा नीली शिमला मिर्च का उत्पादन किया जा रहा है। रंग-बिरंगी शिमला मिर्च देश भर में अपने स्वाद का जायका बिखेरने को तैयार हैं। कई रंगों में उगाई जाने वाली शिमला मिर्च कृषि विज्ञान केन्द्र अम्बरपुर की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
कई रंगों में उत्पादित शिमला मिर्च की फसल के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र अम्बरपुर में 500 वर्गमीटर क्षेत्रफल में 2 लाख की लागत का ग्रीन शेडनेट बनाया गया। इस शेडनेट की नेट 5 साल तक प्रभावी रहती है। इस शेडनेट मे रंगीन शिमला मिर्च की नर्सरी उन्नत तकनीक का प्रयोग कर तैयार की गई। रेज्ड बेड पर पौध रोपण किया गया। पूरे क्षेत्रफल मे कुल 875 पौंधों की रोपाई की गई। इन पौधों में समय-समय पर संस्तुत मात्रा में खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग तथा जल प्रबंधन की उचित व्यवस्था की गई।
जरूरत के मुताबिक निराई-गुड़ाई एवं कीट रोग प्रबंधन हेतु एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन तकनीक अपनाई गई। शेडनेट मे होने के कारण शुरुआत मे फलत देर से हुई, परन्तु अब फसल से गुणवत्तायुक्त बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अच्छा मुनाफा कमाने के लिए बड़े शहरों के मॉल और फाइव स्टार होटलों से भी संपर्क कर रहे हैं।
वैज्ञानिकों के मुताबिक पोषक तत्वों से भरपूर रंगीन शिमला मिर्च की मांग पहले से ही है। चूंकि इसका उत्पादन शिमला में होने की वजह से भाव महंगा ही रहता है, इस लिहाज से यहां की शिमला सस्ती पडने के चलते मिर्च हाथों-हाथ बिकने की भरपूर संभावना है।
इस शिमला मिर्च की खेती कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। शिमला मिर्च की नर्सरी व उत्पादन करने वाले कृषि वैज्ञानिक डा. वीके सिंह बताते हैं, कि इस फसल से अब तक कुल 2625 किलोग्राम उत्पादन किया जा चुका है। इस उत्पादन का औसत मूल्य 70 रुपये प्रति किलो की दर से मिला। इस हिसाब से 1 लाख 83 हजार 750 रुपये की फसल बिकी।
इसके उत्पादन में 53 हजार रुपये की लागत आई। यदि शेडनेट की लागत को 5 वर्षो में विभाजित किया जाय तो 40 हजार रुपये प्रतिवर्ष आती है। इस तरह कुल उत्पादन लागत 93 हजार रुपये हुई। सारा खर्च निकालने के बाद 500 वर्गमीटर क्षेत्रफल से 90 हजार 750 रुपये का शुद्ध लाभ मिला है।
इस शिमला मिर्च की बेमौसम फलत होना भी किसानों के लिए किसी वरदान से कम नही है। बेमौसम शिमला मिर्च जब बाजार में पहुंचेगी तो इसकी मांग खूब होगी। लिहाजा, भाव भी अच्छा मिलेगा। इसे देखते हुए यहां के कृषि वैज्ञानिक किसानों को इसकी खेती करने को प्रेरित करने के साथ ही केन्द्र में भी बड़े पैमाने पर शिमला मिर्च का उत्पादन करने की तैयारी में हैं।