यहां पर लंबे समय से घाघरा नदी में डाल्फिन की उछलकूद देखी जाती रही है। तटीय क्षेत्र के ग्रामीणों ने इनको सूंस नाम दे रखा है। इनकी अठखेलियों को देखने के लिए क्षेत्र के ग्रामीण अक्सर घाघरा नदी के तट जुटते हैं। पानी के ऊपर आकर अठखेलियां करते हुए इन्हें कभी भी देखा जा सकता है।
वन विभाग की मानें तो ये गैंगटिक डाल्फिन प्रजाति की हैं। नदी के जल को स्वच्छ रखने में इनकी अहम भूमिका है। वहीं ये मनुष्य के जीवन के लिए कोई खतरा भी नहीं हैं। हाल ही में इनकी गणना का काम शुरू हुआ था। जिले की सीमा में घाघरा नदी के अंदर करीब 16 डाल्फिन चिह्नित की गई हैं।
ये रेउसा क्षेत्र से लेकर रामपुर मथुरा क्षेत्र तक घाघरा नदी में उछलकूद मचाती रहती हैं। इनकी उछलकूद लोगों का मन मोह रही है। गणना के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने वन कर्मियों को इन पर नजर रखने व उनकी सुरक्षा करने के निर्देश दिए हैं। निर्देश के बाद वन कर्मी अब घाघरा नदी के पानी पर नजर रख रहे हैं।