सीतापुर। जन शिकायतों का निस्तारण सीएम योगी आदित्यनाथ की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। बावजूद इसके अफसर जन समस्याओं को सही ढंग से समय से निस्तारण नहीं कर रहे हैं। 38 संदर्भों के निस्तारण की अवधि समाप्त होने के बाद भी उनका समाधान नहीं हो सका है। इसमें नौ मुख्यमंत्री संदर्भ हैं।
जन सामान्य अपनी समस्याओं के निस्तारण के लिए गांव से लेकर राजधानी तक की खाक छानने के बाद भी सुकून नहीं पा रहा है। इसका मुख्य कारण है कि जिन अफसरों को समस्या का समाधान करना है, वह इस कार्य के प्रति गंभीर नहीं हैं। समस्याओं का समय से निस्तारण नहीं किया जा रहा है।
अधिकतर जन शिकायतों का निस्तारण गुणवत्तापरक नहीं किया जाता है। जिससे एक ही शिकायत की कई बार पुनरावृत्ति होती है। पीड़ित पक्ष तमाम प्रयासों के बाद भी समस्या का हल न होने से आहत हैं। जन शिकायतों के निस्तारण की डीएम स्तर से नियमित समीक्षा करने के बाद भी जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। आंकड़े इसके गवाही हैं।
डीएम अखिलेश तिवारी ने शनिवार को जन शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा की थी। इसमें पाया गया कि विभिन्न स्तरों से प्राप्त 38 शिकायतों का पुलिस अधीक्षक, एसडीएम महोली, बिसवंा, मिश्रिख, कोतवाल, डीपीआरओ, भूमि संरक्षण अधिकारी समेत 25 अफसरों ने निस्तारण समय बीत जाने के बाद भी नहीं किया है