फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डीएम ने अपने कब्जे में लिए नजूल अभिलेख

विज्ञापन
विज्ञापन
सीतापुर। सीतापुर व खैराबाद की नजूल की जमीन के अभिलेख जिलाधिकारी ने अपने कब्जे में ले लिए है। वजह, जिला प्रशासन को इन अभिलेखों में गड़बड़ी की आशंका थी। वैसे भी सीतापुर नगर पालिका में मनमाने ढंग से जमीन आवंटित कर बड़ा घोटाला हुआ है। आरोपियों की फाइल शासन स्तर पर लटकी है। इससे कभी भी इन पर कार्रवाई हो सकती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
विज्ञापन


जिला प्रशासन ने सीतापुर व खैराबाद की नजूल जमीन का सर्वे कराया था। इसमें सीतापुर नगरपालिका में 1764 प्लाट मिले थे जिनका एरिया 27 लाख 32 वर्गमीटर था। इसी प्रकार खैराबाद इलाके में 5318 नजूल के प्लाट हैं। इन प्लाटों का एरिया 501 एकड़ है। इन प्लाटों में तमाम अवैध कब्जे बने हुए हैं।

सबसे खराब हालत सीतापुर नगरपालिका की है। यहां पर तो जमीन आवंटन में बहुत बड़ा घोटाला हुआ था। निकाय के कई पॉश इलाकों में बिना शासन/जिलाधिकारी की अनुमति के जमीन आवंटन कर दी गई है। इसके अलावा मनमाने तरीके से महज सौ व 50 रुपये के वार्षिक किराए पर दे दिया गया है।
विज्ञापन


तत्कालीन जिलाधिकारी ने आवंटित पूरी जमीन के पट्टे को अवैध बताते हुए शासन को रिपोर्ट भेज दी थी लेकिन 10 साल से भी अधिक का समय बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो सकी है। वहीं खैराबाद में भी नजूल जमीन पर तमाम अवैध कब्जे हुए हैं। इससे प्रशासन को अंदेशा था कि जिम्मेदार इन अभिलेखों में और गड़बड़ी कर सकते हैं। इस वजह से जिला प्रशासन ने दोनों नगरपालिका से अभिलेख मंगवाकर अपने कब्जे में ले लिया है। अब जिला प्रशासन इन अभिलेखों का सत्यापन करेगा।

सिटी मजिस्ट्रेट प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने कहा कि दोनों नगरपालिका से नजूल के अभिलेख ले लिए गए हैं। नगरपालिका से नजूल की जमीन पर अवैध कब्जे की रिपोर्ट मांगीं गई है।

पूर्व के प्रशासनिक अफसरों की मंशा पर उठ चुके सवाल
तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. सारिका मोहन ने दिसंबर 2017 में प्रमुख सचिव नगर विकास को पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने तत्कालीन प्रशासनिक अफसरों की मंशा पर ही सवाल उठाए थे। डीएम ने कहा कि 1995-2005 के मध्य घोटाले हुए। आगे भी ऐसे घोटाले की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। इस दौरान तत्कालीन अफसरों द्वारा कोई संज्ञान न लिया जाना, बिना शासन की अनुमति के मनमुताबिक आवंटन किए जाने में अफसरों की भूमिका संदेहास्पद लग रही है। अगर इन अफसरों ने गंभीरता दिखाई होती तो यह घोटाला नहीं हुआ होता।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें