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आधा-अधूरा खुलासा, कोई मदद नहीं, बेटियों का सबकुछ अधर में!

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ट्रिपल मर्डर मामला : एक माह पहले उजड़ गया था खुशहाल परिवार
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जिंदगी के फलसफे पर अकेले बढ़ी जा रहीं बेटियां
नौकरी, न मुआवजा और न ही पुख्ता सुरक्षा के इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
सीतापुर। दाल व्यापारी सुनील जायसवाल, पत्नी कामिनी व बेटे की लूटपाट के दौरान हुई हत्या को आज एक माह पूरे हो गए हैं। वारदात के 30 दिन बीत गए लेकिन अब तक जख्म हरे हैं। पुलिस भी आधे-अधूरे खुलासे के नाम पर अपनी पीठ थपथपा रही है। न तो लूटी गई रकम मिली है और न ही सभी आरोपी गिरफ्त में आ सके हैं। हालांकि ढेरों आश्वासनों व वादों के बीच व्यापारी की दोनों बेटियां शिवानी व ऋचा जिंदगी के फलसफे पर अकेले ही बढ़ी जा रही हैं। दोनों बेटियां पढ़ाई छोड़ अपने पिता के कारोबार को संभाल रहीं हैं। बेटियों को मदद का ढांढस बंधाकर सब ओझिल हो गए।
कॉलेज कैंपस और लग्जरी दफ्तर से निकलकर बेटियों की जिंदगी दाल की दुकान में सिमटती नजर आ रही है। मदद का दंभ भरने वाले भी अब नहीं दिखते। शिवानी बतातीं हैं कि प्रभारी मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने सिर पर मदद का हाथ रखा था। लखनऊ में सीएम से मिलवाया था। सीएम योगी आदित्य नाथ ने पूरा सपोर्ट करने को कहा था। कहा था, जो भी बात हो जिले की प्रभारी मंत्री रीता बहुगुणा जोशी से कहना है। पूरी मदद की जाएगी। प्रभारी मंत्री ने भरोसा दिया था कि नौकरी की चाह है तो मिलेगी। पढ़ना चाहती हैं तो पढ़ाई का खर्च दिया जाएगा। मुआवजा भी दिलाया जाएगा। सुरक्षा की गारंटी दी गई थी। सीबीआई जांच पर भी गौर करने को कहा गया था, लेकिन वक्त के आगे वादे भी खो गए। शिवानी ने बताया कि कोतवाली पुलिस अब उसका फोन ही नहीं उठाती है। उनकी गुहार है कि सभी मुल्जिम पकड़े जाएं। पढ़ाई का खर्च दिया जाए या अच्छी नौकरी मिले। तंगी के चलते पिता की विरासत को संभाल रहीं दोनों बेटियां कहती हैं कि वक्त ने सब कुछ सिखा दिया। वरना पापा तो हमें दुकान पर न आने की बात कहते थे। मेडिकल की पढ़ाई छोड़ पिता की विरासत संभालना शिवानी का शौक नहीं, बल्कि उसकी मजबूरी है। पिता, मां और भाई की हत्या के बाद उसे मजबूरन घर का खर्च चलाने के लिए पिता का कारोबार संभालना पड़ रहा है। शिवानी का कहना है कि वह अभी पढ़ना चाहती है। वह एम टेक करना चाहती है।
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एक आरोपी, कुछ बरामदगी को वर्कआउट बता रही पुलिस
सिविल लाइंस में छह जून को हुए ट्रिपल मर्डर मामले में पुलिस कार्रवाई सिर्फ रस्म अदाएगी तक सीमित है। रामकोट के कांशीराम कॉलोनी निवासी शरीफ की गिरफ्तारी और कुछ नकदी, दस्तावेज बरामदगी कर खुलासे की कहानी में दम नहीं दिखता। हालांकि पुलिस का तर्क है कि एक अन्य आरोपी सूरज यादव को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है उससे कहानी साफ हो जाएगी। पर आधे-अधूरे खुलासे से पुलिस कटघरे में है। लूट की पूरी रकम भी नहीं मिल सकी है। वहीं अन्य आरोपियों का भी सुराग नहीं लगा है।
अब आया कर्ज का बोझ
बेटियों पर जीविका चलाने के साथ कर्ज का बोझ भी आ गया है। शिवानी व ऋचा जायसवाल ने बताया कि पिता ने बैंक से करीब एक करोड़ रुपये कर्ज लिया था। उनकी समझ में नहीं आ रहा कि अब कर्ज कैसे अदा किया जाएगा। दोनों को शिकायत है कि जिम्मेदार अफसर, जनप्रतिनिधि ने अब तक बड़े-बड़े आश्वासन दिए, लेकिन कर्ज अदायगी को लेकर कोई रास्ता नहीं सुझा रहा है। अपने कर्ज को लेकर उन्होंने सीएम से भी चर्चा की थी, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला। उनकी चाह है कि कर्ज नहीं तो उनका ब्याज माफ ही हो जाना चाहिए।
बकायेदार नहीं दे रहे पैसा
बकायेदार रुपये लौटाने से कतरा रहे हैं। व्यापारी की बेटी शिवानी ने कहा कि पुलिस बकाया रुपये दिलाने के लिए कोई मदद नहीं कर रही। उसका कहना है कि उसके पिता के हाथ का करीब 30 लाख रुपये कई लोगों के पास बकाया है। यदि वह मिल जाए तो उनका कुछ काम आसान हो जाए।
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पुलिस ने दूसरे मुल्जिम सूरज को रिमांड पर लिया है। उसके जरिये कई अहम साक्ष्य संकलित किए गए हैं। दो अन्य मुल्जिमों की तलाश में टीमें लगी हैं। जहां तक लड़कियों के फोन न उठाने की बात है। यह गलत है। सीओ, कोतवाल सभी स्वयं उनसे संपर्क बनाए हुए हैं। दो लड़कियों को शस्त्र लाइसेंस देने की प्रक्रिया चल रही है। उनको शासकीय सेवा में शामिल करने व मुआवजा दिलाने की कार्रवाई चल रही हैं। उनकी सुरक्षा का पूरा खयाल रखा जा रहा है। हरसंभव मदद के लिए पुलिस उनके साथ है।
मृगेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक
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