उफनाई घाघरा नदी से तटीय क्षेत्रों में तबाही सा आलम है। 13 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं क्षेत्र के सारे मार्ग जलमग्न हो गए। करीब 125 गांव बाढ़ के मुहाने पर हैं। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है, इससे मुसीबत कम होती नजर नहीं आ रही है।
ग्रामीणों ने सुरक्षित ठिकानों की तलाश में पलायन करना शुरू कर दिया है। प्रशासन की तरफ से सामान निकलवाने की व्यवस्था न होने से ग्रामीण साइकिलों से व सिर पर सामान ढो रहे हैं। उधर, घाघरा व शारदा बैराज से पौने तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
इससे क्षेत्र में हालात बद से बदतर होने के आसार हैं। जानकारों का कहना है कि नेपाल व उत्तराखंड में पहाड़ों पर हो रही बारिश से शारदा व घाघरा उफनाई हैं। घाघरा के उफनाने से कोनी, लोध पुरवा, फौजदार पुरवा बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन गांवों में पानी घुस गया है।
गांव के सभी मार्गों पर पानी भरा गया। घरों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। यहां रहने वाले परिवार या तो पक्के मकानों की छतों पर डेरा डाले हैं, या फिर नाव पर बैठ समय गुजार रहे हैं। गांव के कुछ ऊंचे टीले भी ग्रामीणों को राहत दे रहे हैं। घरों में पानी घुसने से अनाज व राशन खराब हो रहा है।
चूल्हा जलाने के लिए भी स्थान नहीं मिल रहा है। किसी तरह नाव पर ही खाना पक रहा है। जबकि निर्मलपुरवा, दुर्गा पुरवा, गोड़ियन पुरवा, पासिन पुरवा, राम लाल पुरवा, सिसैया बाजार, सिसैया पुरवा, जैतहिया, चंद्रभाल पुरवा, मरेली आदि गांव पानी से घिरेे हैं। गांवों के रास्ते पानी में समा चुके हैं।
जलस्तर जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उसे देखकर लग रहा है कि जल्द ही तटीय क्षेत्र के करीब सवा सौ गांव बाढ़ की जद में आ जाएंगे। घाघरा नदी में उफान व बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए ग्रामीणों ने सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आ गई, बावजूद इसके प्रशासन की तरफ से बाढ़ जैसी कोई चेतावनी तटीय क्षेत्र के ग्रामीणों को नहीं दी गई। रामपुर मथुरा क्षेत्र में घाघरा में बाढ़ आ गई है। अंगरौरा, शुक्लनपुरवा, पंडित पुरवा, कनरखी गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।
प्रशासन का हाल यह है कि बाढ़ आने के बाद किसी तरह की मदद पीड़ितों को नहीं पहुंचाई गई है। जहां गांजरी क्षेत्र में हाय तौबा मची हुई है। वहीं घाघरा व शारदा बैराज से रविवार को 2,69,489 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी सीतापुर पहुंचने पर तबाही बढ़ना तय है।