फार्मासिस्ट व नर्सों की हड़ताल से मंगलवार को स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गईं। न ओपीडी खुली और न ही इमरजेंसी में कोई इलाज हुआ। जो मरीज भर्ती थे, उन्हें जबरन डिस्चार्ज किया जाता रहा। अस्पताल में भर्ती मरीज व उनके तीमारदार मिन्नते करते रहे लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा।
गंभीर मरीजों को भी अस्पताल से बाहर कर दिया गया। कुछ लोग जैसे-तैसे निजी अस्पताल में भर्ती हुए। स्वास्थ्य महकमे ने हड़ताल से निपटने के लिए कोई व्यापक इंतजाम नहीं किए थे, इस वजह से परेशानी काफी बढ़ गई। हड़ताल के कारण 13 ऑपरेशनों को टालना पड़ा।
अपनी मांगों को लेकर मंगलवार सुबह फार्मासिस्ट व नर्सें हड़ताल पर चली गईं। जिसकी वजह से ओपीडी, पर्चा काउंटर, दवा वितरण, एक्सरे, पैथालॉजी, अल्ट्रासाउंड, मुख्य औषधि भंडार में ताले लटकते रहे। फार्मासिस्ट व नर्सों ने इमरजेंसी सेवा भी ठप रखी। डॉक्टर ओपीडी में नहीं बैठ सके, जो गंभीर मरीज इमरजेंसी पहुंचे, उन्हें भी वापस कर दिया गया।
जिला अस्पताल में गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों के तीमारदार भी इलाज के लिए गुहार लगाते दिखे लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। कुछ तीमारदारों ने मरीजों की हालत बिगड़ने पर उन्हें डिस्चार्ज कराकर निजी अस्पतालाें में भर्ती कराया। कुछ ऐसा ही नजारा महिला अस्पताल का था।
संविदा कर्मियों से इमरजेंसी सेवाएं ली जा रहीं थीं। सुबह सिटी मजिस्ट्रेट राम सेवक द्विवेदी जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन वे भी असहाय दिखे। मरीजों ने मदद की गुहार लगाई लेकिन वह कुछ नहीं कर सके। पर्चा काउंटर, दवा काउंटर व ओपीडी बंद होने से करीब 2200 मरीज बगैर इलाज ही वापस अपने घरों को लौट गए।
विभिन्न वार्डों में भर्ती करीब 150 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। लहरपुर, तंबौर, सिधौली, रेउसा, पहला, कसमंडा, संदना, मिश्रिख, मछरेहटा, इमलिया सुल्तानपुर, महोली, पिसावां, हरगांव, सकरन, बिसवां, अटरिया, रामपुर मथुरा, परसेंडी, खैराबाद आदि स्वास्थ्य केंद्रों में भी इलाज नहीं मिल सका। इसके अलावा 13 ऑपरेशन टालने पड़े। इन मरीजों को मंगलवार के लिए ऑपरेशन की डेट मिली थी।